राजीम में भोजन मिला, पर पानी नहीं… झूठे हाथों से विवाह मंडप तक भटके लोग
गरियाबंद | राजीम
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के राजीम में आयोजित मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का आयोजन एक बार फिर भारी अव्यवस्थाओं और प्रशासनिक लापरवाही के कारण सवालों के घेरे में आ गया है। जिस कार्यक्रम का उद्देश्य गरीब बेटियों को सम्मानपूर्वक विवाह का अवसर देना था, वही कार्यक्रम आम जनता के लिए परेशानी और अव्यवस्था का प्रतीक बनकर रह गया।
🍽️ भोजन मिला… लेकिन पानी नसीब नहीं!
विवाह समारोह में भोजन की व्यवस्था तो की गई, लेकिन उसके बाद जो नज़ारा सामने आया वह शर्मनाक था।
- भोजन स्थल पर पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं
- हाथ धोने के लिए एक भी नल या स्टॉल नहीं
- लोग झूठे हाथों से पानी की तलाश में विवाह स्थल की ओर भटकते रहे
कई लोगों को जैसे-तैसे पानी मिला और वे हाथ धोकर लौट गए, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी दिखे जिन्हें पानी तक नसीब नहीं हुआ और वे झूठे हाथों से ही वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल होने को मजबूर हुए। यह पूरा आयोजन राजिम मे मेला स्थल के पास ही नया मैदान के पास किया गया था।
राजिम मेला और कुंभ कल्प में भी पहले उठ चुके हैं सवाल
यह कोई पहला मौका नहीं है जब राजीम में ऐसे बड़े आयोजनों की अव्यवस्थाएं सामने आई हों।
- राजीम कुंभ कल्प मेला
इन आयोजनों में भी पहले अव्यवस्था, खान-पान और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ चुके हैं।
भाजपा विधायक रोहित साहू का फूटा गुस्सा
राजीम कुंभ कल्प मेले के दौरान अव्यवस्थाओं को देखकर राजीम से भाजपा विधायक रोहित साहू अधिकारियों पर बुरी तरह भड़क गए थे।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा था—
“आप लोग सरकार की इमेज की धज्जियां उड़ा रहे हैं, सरकार की बेइज्जती हो रही है।”
विधायक ने कलाकारों के खाने और पीने के पानी की व्यवस्था में लापरवाही को गंभीर बताते हुए जिला प्रशासन और इवेंट कंपनी को सख्त चेतावनी दी थी। उस दौरान अधिकारी नज़रें चुराते और अगल-बगल देखते नज़र आए थे।
🚨 सुरक्षा व्यवस्था भी भगवान भरोसे
मुख्यमंत्री कन्या विवाह जैसे बड़े आयोजन में सुरक्षा व्यवस्था भी ढीली दिखाई दी—
- चेकिंग मशीनें बंद पड़ी थीं
- कोई भी व्यक्ति कहीं से भी कार और बाइक अंदर ले जाता दिखा
- किसी प्रकार की रोक-टोक नहीं
- पुलिसकर्मी केवल इधर-उधर घूमते नज़र आए
- सुरक्षा का सारा फोकस सिर्फ VIP व्यवस्था तक सीमित रहा
यह स्थिति मेले की सुरक्षा के लिहाज़ से बेहद चिंताजनक है।
🏥 विभागीय कैंप सिर्फ नाम के!
मेले में लगाए गए कई विभागीय कैंप काम से ज़्यादा टाइमपास का केंद्र बनते नज़र आए—
- गरियाबंद आयुष विभाग के कर्मचारी लोगों को जानकारी देने के बजाय आपस में बातचीत में व्यस्त
- बीपी जांच के लिए लोगों को दूसरे कैंप में भेजा जा रहा था
- धमतरी समाज कल्याण विभाग के कर्मचारी यह तक नहीं बता पाए कि वे किस उद्देश्य से कैंप लगाए बैठे हैं
- वहीं गरियाबंद रेशम विभाग ने पूछने पर पूरी जानकारी देकर अपनी जिम्मेदारी निभाई
कई कर्मचारी तो सिर्फ इसलिए बैठे दिखे क्योंकि अधिकारियों ने ड्यूटी लगा दी थी, काम के प्रति कोई रुचि नहीं दिखी।
प्रशासन कब लेगा जिम्मेदारी?
लगातार सामने आ रही इन अव्यवस्थाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि—
- क्या बड़े सरकारी आयोजनों में जमीनी तैयारियों की कोई समीक्षा होती है?
- क्या सिर्फ फोटो और मंचीय कार्यक्रम ही प्राथमिकता बन चुके हैं?
- आम जनता की सुविधा और सुरक्षा आखिर किसके भरोसे छोड़ दी गई है?
मुख्यमंत्री कन्या विवाह जैसे संवेदनशील और सम्मानजनक आयोजन में इस तरह की अव्यवस्थाएं न केवल जनता को परेशान करती हैं, बल्कि सरकार और प्रशासन दोनों की छवि को गहरा नुकसान पहुंचाती हैं।

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