“जब सैयां भइले कोतवाल…” धमतरी में अवैध मुरूम, रेत खनन पर उठे सवाल, खुले आम अवैध लाल ईट निर्माण खनिज विभाग पर मिलीभगत के आरोप
विशेष रिपोर्ट - जयप्रकाश सिन्हा
धमतरी - धमतरी जिले में इन दिनों अवैध खनन और खनिज परिवहन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिले के अलग-अलग इलाकों से मिल रही जानकारी के अनुसार, मुरूम, रेत और लाल ईंट भट्टों का अवैध संचालन धड़ल्ले से जारी है, जबकि खनिज विभाग की भूमिका पर भी संदेह गहराता जा रहा है।
📍 ग्राम सिहाद में मुरूम खदान पर बड़ा खुलासा
ग्राम सिहाद में एक मुरूम खदान का निरीक्षण करने पर चौंकाने वाली स्थिति सामने आई।
यहां खदान संचालक द्वारा खनिज विभाग से रॉयल्टी पर्ची लेने का दावा किया गया, लेकिन मौके पर खनन कार्य के दौरान किसी भी प्रकार की रॉयल्टी पर्ची का उपयोग नहीं किया जा रहा था।
➡️ नियमों के अनुसार, बिना पर्ची के खनन और परिवहन अवैध खनन की श्रेणी में आता है।
➡️ इसके बावजूद खदान में लगातार खुदाई और परिवहन जारी है।
खनिज अधिकारी पर ठेकेदार का पक्ष लेने का आरोप
मामले में जब खनिज अधिकारी से फोन पर संपर्क किया गया, तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि संबंधित ठेकेदार के पास रॉयल्टी पर्ची मौजूद है, जिससे खनन को वैध बताया जा सके। लेकिन जब पत्रकारों द्वारा मौके की वास्तविक स्थिति—जहां बिना नियमों के खुलेआम अवैध परिवहन हो रहा था—की जानकारी दी गई, तो अधिकारी का रवैया पूरी तरह बदल गया।
खनिज अधिकारी का विवादित बयान:
पत्रकारों द्वारा तथ्य रखने पर खनिज अधिकारी ने उल्टा मीडिया पर ही सवाल खड़े करते हुए कहा—
“आपको किसने अधिकार दिया है जांच करने का?”
सवालों के घेरे में विभाग
खनिज अधिकारी का यह बयान कई गंभीर सवाल खड़े करता है—
क्या अवैध खनन को संरक्षण दिया जा रहा है?
क्या विभाग अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए मीडिया पर दबाव बना रहा है?
जब अधिकारी ही जांच से बचते दिखें, तो कार्रवाई की उम्मीद किससे की जाए?
जहां एक ओर मीडिया का काम सच्चाई को सामने लाना और जनहित में सवाल पूछना है, वहीं खनिज अधिकारी का यह रवैया लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कमजोर करने जैसा माना जा रहा है।
अब स्थिति यह बन गई है कि खनिज अधिकारी खुद अपने दामन में झांकने के बजाय मीडिया को ही उसका काम सिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
जिले में अवैध लाल ईंट भट्टों का कारोबार
धमतरी जिले में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से लाल ईंट भट्टों का संचालन किया जा रहा है।
आश्चर्य की बात यह है कि अब तक इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। कई ऐसे जगह है जहाँ पर शासकीय राजस्व की जगह पर हो रहे है अवैध रlलाल ईंट निर्माण।
👉 सूत्रों के अनुसार, हाल ही में कुछ भट्टा संचालकों द्वारा खनिज विभाग में “चढ़ावा” दिए जाने की भी चर्चा है, जिससे विभाग की कार्यशैली पर और सवाल उठ रहे हैं अवैध ईट भट्ठा संचालकों का एक वीडियो वायरल हो रहा है जो खनिज ऑफिस के बाहर बैठे हुए है ।
रेत खदानों में भी खुला खेल
धमतरी से लगे अछोटा ग्राम में रेत खदानों में भी अवैध खनन का खेल जारी है।
ग्रामीणों और ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष का आरोप है कि
—
- कई बार शिकायत करने के बावजूद
- खनिज विभाग कोई कार्रवाई नहीं करता
➡️ इससे प्रशासन की निष्क्रियता साफ नजर आती है।
बड़ा सवाल: कार्रवाई कब?
लगातार सामने आ रहे मामलों से यह सवाल उठता है कि—
- क्या खनिज विभाग अवैध कारोबारियों के साथ मिला हुआ है?
- क्यों शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही?
- क्या पर्यावरण और कानून सिर्फ कागजों तक सीमित हैं?
- आखिर खनिज अधिकारी द्वारा अवैध खनन ठेकेदारों का ही पक्ष क्यों लिया जा रहा है।
- जिले में अवैध खनन और लाल ईट भट्टों के संचालन का मुद्दा अब गंभीर रूप लेता जा रहा है।
यदि समय रहते इस पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान होगा, बल्कि प्रशासन की विश्वसनीयता भी सवालों के घेरे में आ जाएगी।





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