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Wednesday, 18 March 2026

धमतरी में राशन दुकानों के संचालन पर गंभीर आरोप, पूर्व खाद्य निरीक्षक पर ठेकेदारी प्रथा से नियंत्रण के आरोप

धमतरी में राशन दुकानों के संचालन पर गंभीर आरोप, पूर्व खाद्य निरीक्षक पर ठेकेदारी प्रथा से नियंत्रण के आरोप

धमतरी जिले के ग्राम अछोटा की मां संतोषी महिला स्वयं सहायता समूह और खेमलता महिला समूह ने खाद्य विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समूहों ने आरोप लगाया है कि राशन दुकानों का संचालन नियमों के विपरीत फर्जी तरीके से कराया जा रहा है, जिसमें पूर्व खाद्य निरीक्षक नरेश पिपरे का नाम भी सामने आया है।

महिला समूहों का कहना है कि पूर्व खाद्य निरीक्षक द्वारा फर्जी स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से जिले की कई राशन दुकानों का संचालन ठेकेदारी प्रथा से कराया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ समूह ऐसे हैं जो दो से तीन राशन दुकानों का संचालन कर रहे हैं, जबकि नियमानुसार एक समूह को केवल एक ही दुकान का संचालन मिलना चाहिए।

समूहों ने बताया कि शीतला मैया स्वयं सहायता समूह (ग्राम रूद्री) और प्रीति महिला स्वयं सहायता समूह (बांसपारा) द्वारा एक से अधिक दुकानों का संचालन किया जा रहा है। खास बात यह है कि प्रीति महिला समूह में केवल अध्यक्ष और सचिव ही हैं, अन्य सदस्य नहीं हैं, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।

सूत्रों के अनुसार, शहरी क्षेत्र के समूहों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों की राशन दुकानों का संचालन भी किया जा रहा है, जिसकी शिकायत पहले भी जनदर्शन में की जा चुकी है। बावजूद इसके अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से स्थानीय समूहों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

महिला स्वयं सहायता समूहों ने आरोप लगाया कि संबंधित खाद्य अधिकारी की बड़े नेताओं और अधिकारियों से सांठगांठ होने के कारण कार्रवाई लंबित है। उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

साथ ही उन्होंने मांग की कि जिन समूहों को एक से अधिक दुकानों का संचालन दिया गया है, उन्हें सीमित कर एक दुकान तक रखा जाए और पात्र समूहों को भी संचालन का अवसर दिया जाए।

समूहों ने रिसाईपारा पश्चिम, रामपुर वार्ड, मथुराडीह, बागाडोर, अर्जुनी संजारी, रूद्री, सोरम, अछोटा और पोटियाडीह क्षेत्रों की राशन दुकानों की जांच कराने की भी मांग की है।

अंत में समूहों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले में कार्रवाई नहीं की गई तो वे धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी तत्परता दिखाता है और क्या आरोपों की निष्पक्ष जांच कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती है या नहीं।

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