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Tuesday, 24 March 2026

धमतरी में श्रम अन्न योजना में बड़ी लापरवाही: समय से पहले बंद हो रहा भोजन केंद्र, गुणवत्ता पर भी उठे सवाल

 धमतरी में श्रम अन्न योजना में बड़ी लापरवाही: समय से पहले बंद हो रहा भोजन केंद्र, गुणवत्ता पर भी उठे सवाल


धमतरी - छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना धमतरी में अनियमितताओं की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। श्रमिकों को सस्ती और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाई जा रही इस योजना में समय पालन और भोजन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

धमतरी जिले में संचालित श्रम अन्न योजना के तहत श्रमिकों को मात्र ₹5 में भरपेट भोजन देने का प्रावधान है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

श्रम विभाग के अनुसार जिले में यह योजना तीन प्रमुख स्थानों पर संचालित की जा रही है—

  • मकई गार्डन (सुबह 9:00 से 11:00 बजे तक)
  • तहसील कार्यालय के पास (सुबह 11:00 से दोपहर 2:00 बजे तक)
  • श्याम तराई मंडी

लेकिन निरीक्षण के दौरान पाया गया कि निर्धारित समय पर भोजन वितरण नहीं किया जा रहा है और कई स्थानों पर समय से पहले ही केंद्र बंद कर दिए जाते हैं।

समय से पहले बंद, श्रमिकों को परेशानी

मकई गार्डन में देखा गया कि ठेकेदार के कर्मचारियों द्वारा भोजन शेष रहने के बावजूद समय से पहले ही वितरण बंद कर दिया गया, जिससे कई श्रमिक भोजन से वंचित रह गए।

भोजन की गुणवत्ता पर सवाल

योजना के तहत तय मेन्यू के अनुसार भोजन देने का नियम है, लेकिन—

  • दाल में अत्यधिक पानी मिलाया जा रहा है
  • रेडीमेड अचार में भी पानी मिलाने की शिकायत
  • भोजन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में कमी

फोटो में अलग, हकीकत में अलग

नियमों के अनुसार ठेकेदार को प्रतिदिन भोजन का फोटो विभाग को भेजना होता है, लेकिन—

  • फोटो के लिए अलग से सजी हुई थाली तैयार की जाती है
  • वास्तविकता में श्रमिकों को कम गुणवत्ता वाला भोजन दिया जाता है

श्रम विभाग की चुप्पी पर सवाल

इस पूरे मामले की जानकारी संबंधित विभाग को दिए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि कहीं इस गड़बड़ी में विभाग के कुछ अधिकारी भी शामिल तो नहीं।

श्रम अन्न योजना का उद्देश्य श्रमिकों को सस्ता और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है, लेकिन धमतरी में इसकी जमीनी स्थिति योजना की मंशा के विपरीत दिखाई दे रही है। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो यह योजना भ्रष्टाचार और लापरवाही का उदाहरण बन सकती है।

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