धमतरी में राशन दुकान पर बवाल: कागजों में समूह, असल में पूर्व अधिकारी का कब्जा? जांच से क्यों भाग रहे जिम्मेदार! शिकायत करने पर बिना जांच किये राशन विक्रेता को किया बाहर
धमतरी | न्यूज़ मितान बंधु
धमतरी जिले के ग्राम अछोटा स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान में संचालन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। कागजों में इस दुकान का संचालन “जय मां अंगारमोती महिला स्वयं सहायता समूह” के नाम पर दर्ज है, लेकिन हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
गंभीर आरोप क्या हैं?
अछोटा की “मां संतोषी महिला स्वयं सहायता समूह” ने आरोप लगाया है कि इस दुकान का वास्तविक संचालन धमतरी के एक पूर्व खाद्य अधिकारी द्वारा किया जा रहा है। यह सीधा-सीधा शासन की व्यवस्था और पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।
कलेक्टर से शिकायत, फिर बढ़ा विवाद
मामले की शिकायत कलेक्टर से किए जाने के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। आक्रोशित समूह और राशन विक्रेता के बीच दुकान परिसर में जमकर विवाद हुआ। हालात इतने बिगड़ गए कि राशन विक्रेता अम्बा रामटेके को बिना किसी लिखित आदेश के दुकान से हटा दिया गया।
सबसे बड़ा सवाल – बिना आदेश कार्रवाई क्यों?
बिना किसी आधिकारिक दस्तावेज के किसी विक्रेता को हटाना नियमों की खुली अनदेखी है। इससे यह सवाल उठता है कि आखिर किसके दबाव में यह कार्रवाई की गई?
मीडिया पर भी सवाल, सच्चाई से क्यों भाग रहे?
घटना की जानकारी मिलने पर न्यूज़ मितान बंधु की टीम मौके पर पहुंची और पूरे घटनाक्रम की ग्राउंड रिपोर्टिंग की। इस दौरान एक अन्य मीडिया संस्थान द्वारा बिना सत्यता की जांच किए यह खबर प्रसारित कर दी गई कि मीडिया को दबाव बनाने के लिए बुलाया गया था।
जबकि हकीकत यह है कि घटना की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है, जो सच्चाई को सामने लाने के लिए पर्याप्त है।
जांच से डर क्यों?
सबसे अहम सवाल यही है—
👉 अगर सब कुछ नियमों के अनुसार है, तो जांच से डर क्यों?
👉 आखिर किसे बचाने की कोशिश हो रही है?
साफ है कि विभागीय जांच होने पर “दूध का दूध और पानी का पानी” हो जाएगा। लेकिन जांच से बचने की कोशिश अपने आप में संदेह को जन्म देती है कि कहीं न कहीं कोई बड़ी गड़बड़ी जरूर है।
न्यूज़ मितान बंधु की मांग:
➡ पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो
➡ जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट की जाए
➡ महिला समूहों के अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए
धमतरी का यह मामला सिर्फ एक राशन दुकान का विवाद नहीं, बल्कि व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही की परीक्षा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पर सख्त कदम उठाता है या फिर मामला दबा दिया जाता है।


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