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Thursday, 14 May 2026

महासमुंद गैस घोटाला: जिला खाद्य अधिकारी निकला मास्टरमाइंड, 1.5 करोड़ की गैस हेराफेरी का खुलासा

 

महासमुंद गैस घोटाला: जिला खाद्य अधिकारी निकला मास्टरमाइंड, 1.5 करोड़ की गैस हेराफेरी का खुलासा


छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में सामने आए करोड़ों रुपये के गैस घोटाले ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। पुलिस जांच में इस मामले का सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि करीब 1.5 करोड़ रुपये की गैस हेराफेरी का कथित मास्टरमाइंड खुद जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव निकला। मामले का खुलासा पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार की निगरानी में हुई जांच के बाद हुआ।

ऐसे बुना गया करोड़ों की हेराफेरी का जाल

पुलिस के अनुसार, जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव ने गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर और रायपुर निवासी मनीष चौधरी के साथ मिलकर एलपीजी गैस की अवैध बिक्री की पूरी साजिश तैयार की थी। आरोपियों ने 6 एलपीजी कैप्सूल में भरी गैस का गलत आकलन दिखाकर करीब 102 मीट्रिक टन गैस को ठिकाने लगाने की योजना बनाई।

जांच में सामने आया कि इन कैप्सूलों से लगभग 92 टन गैस अवैध रूप से निकाल ली गई। इसके बाद सबूत मिटाने के लिए दोबारा वजन कराया गया और फर्जी पंचनामा तैयार कर कलेक्टोरेट में जमा कर दिया गया।

लीकेज का बहाना, अंदर चल रहा था बड़ा खेल

पूरे मामले को छिपाने के लिए जिला खाद्य अधिकारी ने प्रशासन और पुलिस को यह जानकारी दी कि गैस कैप्सूल में लीकेज है। लेकिन तकनीकी जांच में यह दावा पूरी तरह गलत साबित हुआ। पुलिस को किसी प्रकार का लीकेज नहीं मिला, जिसके बाद पूरे मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं।

80 लाख में हुई गैस की डील

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि चोरी की गई गैस को बेचने के लिए कई एजेंसियों से संपर्क किया गया था। अंततः ठाकुर पेट्रोकेमिकल के साथ करीब 80 लाख रुपये में सौदा तय हुआ। इस अवैध कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा अजय यादव को मिला।

जांच एजेंसियों के मुताबिक:

  • अजय यादव को करीब 50 लाख रुपये मिले
  • पंकज चंद्राकर को 20 लाख रुपये
  • मनीष चौधरी को 10 लाख रुपये
  • शेष रकम अन्य सहयोगियों में बांटी गई

तीन गिरफ्तार, दो आरोपी फरार

पुलिस ने अब तक तीन मुख्य आरोपियों —

  • अजय कुमार यादव
  • पंकज चंद्राकर
  • मनीष चौधरी

को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, मामले में दो अन्य आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश जारी है।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला

आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 316(3), 316(5), 61, 238, 336(3), 338, 340(2) के साथ आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 और 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

जांच में हो सकते हैं और बड़े खुलासे

पुलिस का मानना है कि इस पूरे घोटाले में और भी लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है। जांच एजेंसियां अब गैस परिवहन, दस्तावेजी प्रक्रिया और वित्तीय लेन-देन से जुड़े अन्य पहलुओं की भी गहराई से जांच कर रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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