पुदीना की खेती
पुदीना (Mint) एक सुगंधित, औषधीय एवं व्यावसायिक फसल है। इसका उपयोग चटनी, पान मसाला, दवा, टूथपेस्ट, कॉस्मेटिक, आयुर्वेदिक दवाइयाँ, पुदीना तेल (Menthol Oil) आदि में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
भारत में पुदीना मुख्यतः उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, पंजाब, हरियाणा में उगाया जाता है।
. पुदीना की प्रमुख किस्में
किस्मविशेषताकोसी (Kosi)अधिक तेल उत्पादनकुशा (Kushal)तेजी से बढ़ने वालीसिम-क्रांतिरोग प्रतिरोधीसिम-सरलछोटे किसान हेतु उपयुक्तजापानी पुदीनामेंथॉल तेल के लिए प्रसिद्ध
. जलवायु एवं मिट्टी
जलवायु
15–30°C तापमान उपयुक्त
हल्की ठंड व पर्याप्त नमी आवश्यक
अधिक गर्मी में सिंचाई जरूरी
मिट्टी
दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सर्वोत्तम
pH मान: 6.0 – 7.5
जल निकास अच्छा होना चाहिए
. खेत की तैयारी
2–3 बार गहरी जुताई
पाटा लगाकर खेत समतल करें
अंतिम जुताई में 10–15 टन गोबर खाद / हेक्टेयर मिलाएँ
. बुवाई का समय एवं तरीका
बुवाई का समय
जनवरी – फरवरी (सिंचित क्षेत्र)
जुलाई – अगस्त (बरसात क्षेत्र)
बुवाई विधि
पुदीना बीज से नहीं, जड़ (सकर्स) से उगाया जाता है
कतार से कतार दूरी: 45 सेमी
पौधे से पौधे की दूरी: 30 सेमी
खाद एवं उर्वरक प्रबंधन
उर्वरकमात्रा (प्रति हेक्टेयर)गोबर खाद10–15 टननाइट्रोजन (N)120–150 किग्राफास्फोरस (P)50–60 किग्रापोटाश (K)40–50 किग्रा
➡ नाइट्रोजन को 2–3 बार में दें।
सिंचाई प्रबंधन
पहली सिंचाई: बुवाई के तुरंत बाद
गर्मी में: 7–10 दिन पर
बरसात में: आवश्यकता अनुसार
⚠ जलभराव से बचाव अनिवार्य
खरपतवार नियंत्रण
2–3 बार निराई-गुड़ाई
आवश्यकता पर Pendimethalin का प्रयोग
रोग एवं कीट प्रबंधन
प्रमुख रोग
जड़ सड़न
पत्ती झुलसा
कीट
माहू
लीफ माइनर
➡ जैविक नियंत्रण:
नीम तेल 3–5 मि.ली./लीटर
ट्राइकोडर्मा का प्रयोग
कटाई एवं उत्पादन
कटाई
पहली कटाई: 90–100 दिन में
वर्ष में: 2–3 कटाई संभव
उत्पादन
उत्पादमात्राहरी पत्तियाँ200–250 क्विंटल/हेक्टेयरपुदीना तेल80–120 किग्रा/हेक्टेयर
पुदीना तेल निकालने की प्रक्रिया
भाप आसवन (Steam Distillation)
तेल को ठंडी, अंधेरी जगह रखें
तेल से मेंथॉल क्रिस्टल भी निकाले जाते हैं
लागत एवं लाभ (प्रति हेक्टेयर अनुमानित)
विवरणराशि (₹)कुल लागत60,000 – 70,000कुल आय1,50,000 – 2,50,000शुद्ध लाभ90,000 – 1,80,000
13. पुदीना खेती के लाभ
✅ कम समय में अधिक लाभ
✅ औषधीय व औद्योगिक मांग
✅ छोटे किसानों के लिए उपयुक्त
✅ तेल व पत्तियों दोनों से आमदनी
पुदीना की खेती कम लागत, कम जोखिम और अधिक लाभ देने वाली फसल है। सही तकनीक, उन्नत किस्म और वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।

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