तुलसी की खेती
तुलसी भारत की एक प्रमुख औषधीय, धार्मिक और सुगंधित पौधा है। आयुर्वेद में इसे “जीवनदायिनी औषधि” कहा गया है। तुलसी का उपयोग औषधि, काढ़ा, चाय, तेल, कॉस्मेटिक और धार्मिक कार्यों में बड़े पैमाने पर होता है। कम लागत और अधिक मांग के कारण तुलसी की खेती किसानों के लिए लाभकारी व्यवसाय बन रही है।
तुलसी की प्रमुख किस्में
किस्मविशेषताराम तुलसीहरे पत्ते, औषधीय उपयोगश्याम (कृष्ण) तुलसीबैंगनी पत्ते, अधिक औषधीय गुणवन तुलसीजंगली किस्म, तेज सुगंधकपूर तुलसीकफ-सर्दी में उपयोगीCIM-आयुर्वेदिक तुलसीवैज्ञानिक रूप से विकसित, अधिक उत्पादन
3. जलवायु एवं मिट्टी
जलवायु
गर्म एवं उपोष्ण जलवायु उपयुक्त
तापमान: 20°C – 35°C
पाले से नुकसान होता है
मिट्टी
दोमट एवं बलुई दोमट सर्वोत्तम
जल निकास अच्छा होना चाहिए
pH मान: 6.0 – 7.5
4. खेत की तैयारी
2–3 गहरी जुताई करें
प्रति हेक्टेयर 10–15 टन गोबर की खाद मिलाएँ
खेत समतल व खरपतवार-मुक्त रखें
5. बुवाई की विधि
(क) बीज से खेती
बीज दर: 200–300 ग्राम/हेक्टेयर
नर्सरी में पौध तैयार कर रोपाई करें
कतार दूरी: 45 सेमी × 45 सेमी
(ख) समय
उत्तर भारत: फरवरी–मार्च / जून–जुलाई
दक्षिण भारत: लगभग वर्षभर
6. सिंचाई प्रबंधन
पहली सिंचाई: रोपाई के तुरंत बाद
बाद में: 15–20 दिन के अंतराल पर
अधिक पानी से जड़ सड़न का खतरा
खाद एवं उर्वरक
खाद/उर्वरकमात्रा (प्रति हेक्टेयर)गोबर की खाद10–15 टननाइट्रोजन80–100 किग्राफास्फोरस40–50 किग्रापोटाश40 किग्रा
नाइट्रोजन को 2–3 भागों में दें।
खरपतवार एवं रोग नियंत्रण
खरपतवार
2–3 बार निराई-गुड़ाई आवश्यक
मुख्य रोग/कीट
पत्ती धब्बा
जड़ सड़
एफिड, इल्ली
नियंत्रण
नीम तेल स्प्रे
जैविक कीटनाशक का प्रयोग
9. कटाई एवं उत्पादन
पहली कटाई: 90–100 दिन बाद
बाद की कटाई: 60–70 दिन के अंतराल पर
एक वर्ष में 2–3 कटाई
औसत उत्पादन
हरा पत्ता: 20–25 टन/हेक्टेयर
सूखा पत्ता: 4–5 टन/हेक्टेयर
10. तुलसी से बनने वाले उत्पाद
तुलसी चाय
तुलसी अर्क
तुलसी तेल
आयुर्वेदिक दवाइयाँ
कॉस्मेटिक उत्पाद
अगरबत्ती, धूप
11. लागत एवं लाभ (अनुमानित)
विवरणराशि (₹/हेक्टेयर)कुल लागत40,000 – 50,000कुल आय1,20,000 – 2,00,000शुद्ध लाभ80,000 – 1,50,000
12. बाजार एवं विपणन
आयुर्वेदिक कंपनियाँ
औषधि मंडियाँ
कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग
स्थानीय हर्बल उत्पाद निर्माता
13. निष्कर्ष
तुलसी की खेती कम लागत, कम जोखिम और अधिक लाभ देने वाली औषधीय खेती है। उचित तकनीक, जैविक खेती और सही बाजार चयन से किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। यह खेती छोटे किसानों और स्वरोज़गार के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।

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