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Tuesday, 14 April 2026

फर्जी निवास प्रमाण पत्र पर एपीओ नियुक्ति का मामला: सांसद ने दिए जाँच के निर्देश

 

फर्जी निवास प्रमाण पत्र पर एपीओ नियुक्ति का मामला: सांसद ने दिए  जाँच के  निर्देश

धमतरी | जयप्रकाश सिन्हा 

धमतरी जिले में संविदा सहायक परियोजना अधिकारी (एपीओ) की नियुक्ति को लेकर उठा विवाद अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है। आरोप है कि वर्तमान में पदस्थ एपीओ ने वर्ष 2011 में कथित रूप से फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर यह पद हासिल किया था।



मामले ने तूल तब पकड़ा जब रूपकुमारी चौधरी ने इस पर संज्ञान लेते हुए जिला कलेक्टर को त्वरित और निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए। लंबे समय से लंबित इस प्रकरण ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला

यह विवाद जिला पंचायत धमतरी में कार्यरत एपीओ की नियुक्ति से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार संबंधित अधिकारी मूलतः बस्तर जिले का निवासी है, लेकिन उसने कथित तौर पर फर्जी निवास प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर नौकरी प्राप्त की।

सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों और तहसीलदार बस्तर की रिपोर्ट में सामने आया है कि प्रमाण पत्र में उपयोग किया गया प्रकरण क्रमांक किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दर्ज है। साथ ही, प्रमाण पत्र पर जारी करने की तिथि का अभाव इसकी वैधता पर गंभीर प्रश्न उठाता है।

भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि भर्ती नियमों की अनदेखी की गई। एपीओ पद के लिए छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना अनिवार्य था, जबकि संबंधित अधिकारी की अधिकांश शैक्षणिक योग्यताएं मध्य प्रदेश से संबंधित बताई जा रही हैं। धमतरी में किया गया उनका रोजगार पंजीयन भी जांच के दायरे में है।

विधानसभा तक गूंजा मामला

यह मुद्दा छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में भी उठ चुका है। ओंकार साहू ने सदन में इस मामले को प्रमुखता से रखते हुए प्रशासन पर संविदा कर्मचारी को बचाने और कार्रवाई टालने के आरोप लगाए।

जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल

कलेक्टर द्वारा गठित जांच टीम की कार्यशैली भी विवादों में है। आरोप है कि टीम ने शिकायतकर्ता का बयान लिए बिना ही अधूरी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी। दो वर्षों से अधिक समय बीतने के बावजूद जांच किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी है।

सांसद के हस्तक्षेप के बाद तेज हुई हलचल

प्रकरण में कार्रवाई नहीं होने से परेशान शिकायतकर्ता ने सांसद रूपकुमारी चौधरी को ज्ञापन सौंपा। इसके बाद सांसद ने  मामले में  कार्रवाई सुनिश्चित करने के बात कही हैं।

अब आगे क्या?

यह मामला अब जिला प्रशासन की साख से जुड़ गया है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि:

  • मामले की पुनः गहन जांच की जाए
  • उनका बयान दर्ज किया जाए
  • दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी को पद से हटाया जाए
  • धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज किया जाए

अब सबकी नजरें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या इस बार ठोस कार्रवाई होगी या मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाएगा। यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो शासन की “जीरो टॉलरेंस” नीति पर भी सवाल उठना तय माना जा रहा है।

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