खनिज विभाग पर उठे गंभीर सवाल: कार्रवाई के नाम पर खेल या अवैध उगाही का नेटवर्क?
विशेष रिपोर्ट - जयप्रकाश सिन्हा
धमतरी जिले के ग्राम अछोटा में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर एक बार फिर खनिज विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। ग्रामीणों व छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने खनिज विभाग पर केवल दिखावटी कार्रवाई करने तथा कार्रवाई की आड़ में कथित रूप से पैसों के लेनदेन का गंभीर आरोप लगाया है।
जानकारी के अनुसार 30 अप्रैल 2026 को खनिज विभाग ने ग्राम अछोटा में अवैध रूप से रेत परिवहन कर रहे तीन ट्रैक्टरों को पकड़ा था। जिनके नंबर CGOSAL2195, CGOS AL8649 और CGOS AM9981 बताए जा रहे हैं। नियम अनुसार इन वाहनों को जब्त कर विधिसम्मत कार्रवाई की जानी थी, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग ने केवल औपचारिकता निभाई और कुछ ही समय बाद तीनों ट्रैक्टरों को छोड़ दिया गया। वर्तमान में तीनों वाहन खुलेआम क्षेत्र में घूमते दिखाई दे रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि वाहन वास्तव में अवैध परिवहन में पकड़े गए थे तो फिर उन पर कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या विभाग ने केवल खानापूर्ति की? या फिर कार्रवाई की आड़ में कोई और खेल चल रहा है? यही सवाल अब आम जनता के बीच चर्चा का विषय बन चुका है।
इस पूरे मामले में जब छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना धमतरी और ग्राम अछोटा के ग्रामीण खनिज विभाग पहुंचे, तब सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली कि संबंधित वाहन मालिकों को केवल नोटिस जारी किया गया है। जबकि दूसरी ओर ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग खुद संदेह के घेरे में है और वास्तविक कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार यह पहला मामला नहीं है। पिछले दिनों ग्राम पोटीयाडीही में एक निजी खेत में चल रहे खनन कार्य में लगी माउंटेन चैन जेसीबी पर भी खनिज विभाग ने कार्रवाई की थी। लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोपहर में कार्रवाई होने के कुछ समय बाद ही जेसीबी मालिक को चाबी वापस सौंप दी गई। इससे विभाग की नीयत पर और भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने यह संदेह पैदा कर दिया है कि क्या खनिज विभाग वास्तव में अवैध खनन रोकना चाहता है या फिर कार्रवाई के नाम पर अवैध वसूली का कोई तंत्र संचालित हो रहा है? यदि कार्रवाई वास्तविक है तो फिर पकड़े गए वाहन दोबारा सड़कों पर कैसे दौड़ रहे हैं?
ग्राम अछोटा में लंबे समय से अवैध रेत उत्खनन का कार्य जारी है। ग्रामीणों द्वारा कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद विभाग की ओर से केवल दिखावटी कार्रवाई किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है। वहीं कुछ स्थानों पर मुरूम खनन की अनुमति लेकर अवैध तरीके से अतिरिक्त परिवहन किए जाने की भी शिकायतें सामने आई हैं, जिससे शासन को भारी राजस्व हानि होने की आशंका है।
मामले का सबसे चिंताजनक पक्ष यह भी है कि जब पत्रकार इस संबंध में खनिज विभाग के अधिकारियों से जानकारी लेने का प्रयास करते हैं, तो उन्हें संतोषजनक जवाब देने के बजाय उल्टा सवाल किया जाता है कि “आपको वहां जाने का अधिकार किसने दिया?” अधिकारियों का यह रवैया न केवल गैर जिम्मेदाराना माना जा रहा है बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के प्रति असम्मान भी दर्शाता है। यह मामला भखारा क्षेत्र में देखने को मिला था जब अवैध परिवहन का काम चल रहा था जब खनीज अधिकारी से संपर्क किया गया तो इस प्रकार से जवाब मिला।
पत्रकार समाज की आवाज और जमीनी सच्चाई को जनता तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। ऐसे में यदि जिम्मेदार अधिकारी ही पत्रकारों से असहयोगपूर्ण और आक्रामक व्यवहार करें तो यह कई गंभीर सवाल खड़े करता है। जिले में पूर्व में पदस्थ रहे खनिज अधिकारियों पर इस प्रकार के व्यवहार के आरोप कभी सामने नहीं आए, लेकिन वर्तमान अधिकारी के कार्यकाल में लगातार विवाद और असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है।
गौरतलब है कि कुछ समय पहले खनिज विभाग की कार्यप्रणाली से नाराज ग्रामीणों ने विरोध स्वरूप अधिकारियों को चूड़ी और साड़ी भेंट कर अपना आक्रोश भी व्यक्त किया था। इसके बावजूद विभाग की कार्यशैली में कोई बदलाव नजर नहीं आ रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 30 अप्रैल को पकड़े गए तीन ट्रैक्टरों पर आखिर वास्तविक कार्रवाई कब होगी? क्या विभाग जनता के सामने पारदर्शिता दिखाएगा या फिर मामला नोटिस और फाइलों तक ही सीमित रह जाएगा? जिले की जनता अब इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रही है।




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