मोती की खेती
पर्ल फार्मिंग: आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मोती की खेती से सुनहरा अवसर
✍️ विशेष लेख | जयप्रकाश सिन्हा
भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ समय के साथ-साथ परंपरागत खेती के साथ नवीन और लाभकारी व्यवसायों की ओर रुझान बढ़ रहा है। इन्हीं उभरते हुए व्यवसायों में पर्ल फार्मिंग (मोती की खेती) एक ऐसा क्षेत्र है, जो कम लागत, कम भूमि और सीमित संसाधनों में भी बेहतर आमदनी का अवसर प्रदान करता है। आज पर्ल फार्मिंग न केवल किसानों, बल्कि युवाओं, स्वरोजगार अपनाने वालों और उद्यमियों के लिए भी एक आकर्षक विकल्प बन चुकी है। वर्तमान मे मांगो को देखते हुए, मोती की खेती सबसे लाभदायक व्यवसाय होगा क्योंकि मोतियों की मांग तेजी से बढ़ रही है। सबसे अच्छी बात यह है कि मोती के आभूषणों का बाजार 2033 तक 34.16 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है । इसी वजह से भारत में मोती की खेती लगातार लोकप्रिय हो रही है।
मोती का महत्व और उपयोग
मोती एक कीमती रत्न है, जिसका उपयोग प्राचीन काल से आभूषणों, धार्मिक कार्यों और औषधीय प्रयोजनों में होता आ रहा है। भारत में मोतियों की मांग शादी-विवाह, त्योहारों, फैशन इंडस्ट्री और ज्योतिष में निरंतर बनी रहती है। शुद्ध और अच्छी गुणवत्ता वाले मोती देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी ऊँचे दामों पर बिकते हैं।
पर्ल फार्मिंग क्या है?
पर्ल फार्मिंग एक वैज्ञानिक विधि है, जिसके माध्यम से सीपियों की वृद्धि और मोती उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसान कृत्रिम वातावरण बनाते हैं। इससे सीपियों में सीप (Oyster) या मसल्स के अंदर कृत्रिम रूप से न्यूक्लियस (बीज) डालकर मोती तैयार किए होती है, जिसके परिणामस्वरूप मोती बनाने वाले पदार्थ, नेकर की परतें बनने लगती हैं। कुछ वर्षों के बाद, किसान सीपियों (Oyster) की सर्जरी करके मोती निकाल सकते हैं। जाते हैं। प्राकृतिक मोती बनने में कई वर्षों का समय लगता है, जबकि पर्ल फार्मिंग के माध्यम से 12 से 24 महीनों में व्यावसायिक मोती प्राप्त किए जा सकते हैं।
मोती की खेती के 4 फायदे
1. इसका बाजार मूल्य बहुत अधिक है
मोती की खेती का सबसे अच्छा पहलू यह है कि इन प्राकृतिक रत्नों की बहुत मांग है। सोने और चांदी के विपरीत, इनकी कीमतों में अक्सर उतार-चढ़ाव नहीं होता है।
संवर्धित मीठे पानी के मोतियों की कीमत लगभग 280 रुपये प्रति ग्राम है।
भारत में संवर्धित खारे पानी के मोतियों की कीमत लगभग 6,000 रुपये प्रति ग्राम है।
2. आसान रखरखाव और भंडारण
एक बार संवर्धित होने के बाद, इन हल्के मोतियों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। ये बहुत जल्दी खराब नहीं होते और इनका उपयोग किसी भी समय आभूषण बनाने या कपड़ों को सजाने के लिए किया जा सकता है।
3. कम श्रम लागत, उच्च रोजगार क्षमता
मोती की खेती में श्रम की आवश्यकता कम होती है क्योंकि यह प्रक्रिया सुव्यवस्थित है और इसमें सीमित जनशक्ति की आवश्यकता होती है। इससे श्रम लागत में काफी कमी आती है। यदि आप मोती की खेती के प्रशिक्षण संस्थान से सर्वोत्तम कौशल और ज्ञान प्राप्त करते हैं, तो लाभ कमाने की संभावना काफी अधिक होती है। इस प्रकार की व्यावसायिक खेती से भारी मुनाफा होता है, इसलिए आय का वितरण भी काफी अच्छा होता है।
4. न्यूनतम व्यय और आवश्यक सामग्री
मोती की खेती में सीमित सेटअप और निवेश लागत लगती है। संसाधन, इनपुट और विधियाँ न्यूनतम खर्च पर आसानी से उपलब्ध हैं। भारत में मोती की खेती के व्यवसाय में सही प्रशिक्षण प्राप्त करके, आप संसाधनों की योजना बनाना और उनकी लागत को अनुकूलित करना सीख सकते हैं। विवेकपूर्ण योजना के साथ, आप अपने निवेशित धन का अधिकतम लाभ उठा सकते हैं।
भारत में पर्ल फार्मिंग की स्थिति
भारत में पर्ल फार्मिंग की शुरुआत दक्षिण भारत के राज्यों जैसे तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश से हुई, लेकिन अब यह तकनीक बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी तेजी से अपनाई जा रही है। विशेष रूप से मीठे पानी की पर्ल फार्मिंग ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक लोकप्रिय हो रही है।
पर्ल फार्मिंग के प्रकार
भारत में मुख्य रूप से तीन प्रकार की पर्ल फार्मिंग की जाती है:
1. मीठे पानी की पर्ल फार्मिंग – तालाब, टैंक या झीलों में
2. खारे पानी की पर्ल फार्मिंग – समुद्र के तटीय क्षेत्रों में
3. समुद्री पर्ल फार्मिंग – बड़े निवेश और उन्नत तकनीक की आवश्यकता
इनमें से मीठे पानी की पर्ल फार्मिंग सबसे आसान और कम लागत वाली मानी जाती है।
मोती की खेती की प्रक्रिया
पर्ल फार्मिंग की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है:
सीपों का चयन: स्वस्थ और मजबूत सीपों का चयन किया जाता है।
सर्जरी प्रक्रिया: विशेषज्ञ द्वारा सीप के अंदर न्यूक्लियस डाला जाता है।
पालन-पोषण: सीपों को साफ और नियंत्रित पानी वाले तालाब या टैंक में रखा जाता है।
देखभाल: पानी की गुणवत्ता, ऑक्सीजन, तापमान और pH स्तर का नियमित निरीक्षण।
कटाई: 12–24 महीनों बाद सीप खोलकर मोती निकाले जाते हैं।
• सफल पर्ल फार्मिंग के लिए प्रशिक्षण लेना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि सर्जरी प्रक्रिया में थोड़ी सी लापरवाही नुकसान का कारण बन सकती है।
भारत में मोती पालन प्रशिक्षण
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत आने वाला सीआईएफए ( सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेशवाटर एक्वाकल्चर ) " मीठे पानी के मोती की खेती " पर राष्ट्रीय प्रशिक्षण प्रदान करता है। यह प्रशिक्षण छोटे सीमांत किसानों को भारत में मीठे पानी के मोती की खेती के व्यवसाय स्थापित करने के लिए आवश्यक उद्यमशीलता कौशल विकसित करने में मदद करता है।
भारत में मोती की खेती के लिए कई अन्य मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण संस्थान भी हैं जो मोती के प्रजनन की पूरी तकनीकी ट्रेनिंग देते हैं। यहाँ भारत के कुछ लोकप्रिय प्रशिक्षण संस्थानों की सूची दी गई है। आप प्रशिक्षण शुल्क और उनके द्वारा सिखाए जाने वाले विषयों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
प्रशिक्षण केंद्र
• मोती संस्कृति (MOTI) और प्रशिक्षण केंद्र औरंगाबाद लघु अवधि
• मीठे पानी के मोती की खेती प्रशिक्षण संस्थानजयपुर6 सप्ताह
• विजार्ड पर्ल फार्मिंग सेंटर हरयाणा2 दिन (व्यावहारिक + सैद्धांतिक अनुप्रयोग)
• स्वास्तिक मोती कृषि एवं प्रशिक्षण केंद्रउतार प्रदेश।10-15 दिन
• मोती खेती प्रशिक्षण (कृषि विज्ञान केंद्र)चंदनगांव, मध्य प्रदेश लागू नहीं
• मोती पालन प्रशिक्षण एवं अनुसंधान अलवर, राजस्थानलागू नहीं
• ICAR – सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेशवॉटर एक्वाकल्चर (CIFA), भुवनेश्वर
पूरा नाम:
Indian Council of Agricultural Research – Central Institute of Freshwater Aquaculture (ICAR-CIFA)
स्थान:
कौसल्यागंगा, भुवनेश्वर – 751002, ओडिशा
छत्तीसगढ़ में मोती की खेती का प्रशिक्षण संबंधी जानकारी निम्न संस्थाओं से प्राप्त की जा सकती है:-
• मत्स्य विभाग, छत्तीसगढ़ शासन
• कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) – विभिन्न ज़िलों में
• इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर
लागत और संभावित मुनाफा
पर्ल फार्मिंग की शुरुआत 50,000 से 1.5 लाख रुपये के निवेश से की जा सकती है। एक तालाब में 500 से 1000 सीप आसानी से पाले जा सकते हैं। यदि सही देखभाल की जाए, तो 60–70% सीपों से गुणवत्तापूर्ण मोती प्राप्त होते हैं।
एक अच्छे मोती की कीमत 500 रुपये से लेकर 10,000 रुपये या उससे अधिक हो सकती है। इस प्रकार 1–2 वर्षों में निवेश से कई गुना अधिक लाभ कमाया जा सकता है।
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NEWS MiTAN BANDHU


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