गौ-पालन : परंपरागत व्यवसाय, आधुनिक संभावनाएँ
भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गौ-पालन का विशेष स्थान रहा है। आज के समय में गौ-पालन केवल दूध उत्पादन तक सीमित न रहकर कृषि, उद्योग, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन का एक समग्र मॉडल बन चुका है। वैज्ञानिक पद्धति से किया गया गौ-पालन किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी साधन सिद्ध हो रहा है।
गौ-पालन से होने वाले प्रमुख लाभ
1. आर्थिक लाभ
- दूध व दुग्ध उत्पादों से नियमित आय
- गोबर, गोमूत्र व गौ-आधारित उत्पादों की बिक्री
- कम पूंजी में निरंतर मुनाफा
- लघु व कुटीर उद्योगों की स्थापना
2. कृषि को लाभ
- जैविक खाद की उपलब्धता
- रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता में कमी
- फसल की गुणवत्ता व उत्पादन में वृद्धि
3. सामाजिक व पर्यावरणीय लाभ
- ग्रामीण स्तर पर रोजगार
- महिलाओं को स्व-रोजगार
- स्वच्छ पर्यावरण व भूमि की उर्वरता में वृद्धि
गोमूत्र के उपयोग : औषधि से जैविक कृषि तक
गोमूत्र को आयुर्वेद में अत्यंत उपयोगी माना गया है। इसके प्रमुख उपयोग निम्न हैं—
औषधीय उपयोग
- रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक
- त्वचा रोग, पेट रोग, मधुमेह में उपयोग
- गोमूत्र अर्क, पंचगव्य औषधि निर्माण
कृषि उपयोग
- जैविक कीटनाशक (नीम, लहसुन, मिर्च मिलाकर)
- फसल रोग नियंत्रण
- बीज उपचार में सहायक
घरेलू व औद्योगिक उपयोग
- प्राकृतिक फिनाइल व कीटाणुनाशक
- धूप-अगरबत्ती निर्माण
- जैविक क्लीनर
गोबर से बनने वाले प्रमुख उत्पाद
गोबर को “ग्रामीण उद्योग का कच्चा माल” कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं—
- जैविक खाद / वर्मी कम्पोस्ट
- गोबर गैस (बायोगैस) – ईंधन व बिजली
- उपले (कंडे)
- गोबर के दीये व मूर्तियाँ
- धूप-अगरबत्ती
- गोबर पेंट
- जैविक फर्श लेपन व प्लास्टर
गाय को चारे के रूप में क्या-क्या दिया जा सकता है
स्वस्थ गाय से ही गुणवत्तापूर्ण उत्पादन संभव है। संतुलित आहार आवश्यक है—
1. हरा चारा
- बरसीम
- नेपियर घास
- ज्वार, मक्का
- लोबिया, बाजरा
2. सूखा चारा
- गेहूं का भूसा
- धान का पुआल
- चना व अरहर का भूसा
3. दाना व संतुलित आहार
- खल (सरसों, मूंगफली)
- चोकर
- मक्का पिसा हुआ
- खनिज मिश्रण व नमक
4. अतिरिक्त पोषण
- स्वच्छ पानी (हमेशा उपलब्ध)
- मौसम के अनुसार आहार संतुलन
दूध से बनने वाले प्रमुख उत्पाद
दूध गौ-पालन का मुख्य उत्पाद है, जिससे अनेक मूल्यवर्धित वस्तुएँ बनती हैं—
घरेलू उपयोग
- दूध
- दही
- छाछ
- मक्खन
व्यावसायिक उत्पाद
- घी
- पनीर
- खोया
- मिठाइयाँ (पेड़ा, बर्फी, लड्डू)
- फ्लेवर्ड दूध
धार्मिक व औषधीय उपयोग
- पंचगव्य
- हवन सामग्री
गाय की प्रमुख उन्नत नस्लें
1. साहीवाल
- अधिक दूध देने वाली
- गर्म जलवायु में उपयुक्त
2. गिर
- रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक
- दूध में वसा प्रतिशत अच्छा
3. थारपारकर
- कम चारे में पालन संभव
- दूध व कृषि कार्य दोनों में उपयोगी
4. राठी
- शुष्क क्षेत्रों के लिए उपयुक्त
- स्थिर दुग्ध उत्पादन
5. रेड सिंधी
- उच्च दुग्ध उत्पादन
- जल्दी अनुकूलन करने वाली नस्ल
- गौ-पालन भारत की ग्रामीण व्यवस्था का आर्थिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय आधार है। यदि इसे वैज्ञानिक तरीके, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़कर किया जाए, तो गौ-पालन किसानों की आय दोगुनी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
गौ-पालन केवल पशुपालन नहीं, बल्कि समृद्ध और स्वस्थ ग्रामीण भारत की कुंजी है।

Post a Comment