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पिग (pig) पालन

  सूअर पालन: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला व्यवसाय


भारत में पशुपालन क्षेत्र तेजी से विविध हो रहा है। परंपरागत गाय-भैंस और पोल्ट्री के साथ अब सूअर पालन भी एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में उभर रहा है। कम लागत, तेज़ वृद्धि दर और बेहतर बाज़ार मांग के कारण यह छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए आय का अच्छा साधन बनता जा रहा है।


 सूअर पालन का महत्व

सूअर मांस (पोर्क) विश्व में सबसे अधिक खाया जाने वाला मांस है। भारत के कई राज्यों—जैसे पूर्वोत्तर, झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार, पश्चिम बंगाल और केरल—में इसकी अच्छी मांग है। सूअर कम समय में अधिक वजन प्राप्त करता है, जिससे किसानों को जल्दी लाभ मिलता है।


 सूअर पालन के लाभ

  • तेज़ वृद्धि दर: 6–8 माह में बाज़ार योग्य वजन
  • कम चारा लागत: घरेलू अपशिष्ट, कृषि अवशेष का उपयोग
  • उच्च प्रजनन क्षमता: एक बार में 8–12 बच्चे
  • कम स्थान की आवश्यकता
  • ग्रामीण रोजगार सृजन

 सूअर पालन के लिए आवश्यक प्रबंधन

1️⃣ आवास व्यवस्था

  • सूखी, हवादार एवं साफ़ जगह
  • पक्की फर्श, जल निकासी की उचित व्यवस्था
  • गर्मी और सर्दी से बचाव

2️⃣ आहार प्रबंधन

  • मक्का, जौ, चावल की भूसी
  • हरी घास, सब्ज़ी अपशिष्ट
  • खनिज मिश्रण व स्वच्छ पानी
  • संतुलित आहार से तेज़ विकास

3️⃣ स्वास्थ्य एवं स्वच्छता

  • नियमित टीकाकरण
  • बाहरी-आंतरिक परजीवी नियंत्रण
  • समय-समय पर पशु चिकित्सकीय जांच

🔹 सूअर की प्रमुख प्रजातियाँ

 1. लार्ज व्हाइट यॉर्कशायर (Large White Yorkshire)

  • सबसे लोकप्रिय विदेशी नस्ल
  • तेज़ वृद्धि, उच्च मांस उत्पादन
  • 90–100 किलोग्राम वजन 6–7 माह में

 2. लैंडरेस (Landrace)

  • लंबा शरीर, अधिक मांस
  • प्रजनन क्षमता अच्छी
  • व्यावसायिक पालन के लिए उपयुक्त

 3. हैम्पशायर (Hampshire)

  • काले शरीर पर सफ़ेद पट्टी
  • मजबूत एवं रोग प्रतिरोधक
  • मांस की गुणवत्ता बेहतर

 4. देशी सूअर (स्थानीय नस्ल)

  • कम देखभाल में पालन संभव
  • रोग सहनशील
  • ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक प्रचलित

 5. घुंघरू (Ghungroo – भारत की उन्नत नस्ल)

  • पश्चिम बंगाल में पाई जाती है
  • तेज़ वृद्धि और अच्छा प्रजनन
  • सरकारी योजनाओं में प्रोत्साहित

🔹 सरकारी योजनाएँ और सहायता

केंद्र व राज्य सरकारें सूअर पालन को बढ़ावा देने हेतु:

  • राष्ट्रीय पशुधन मिशन
  • अनुदान एवं ऋण सुविधा
  • प्रशिक्षण कार्यक्रम
  • उन्नत नस्ल वितरण

🔹 बाज़ार और आय

सूअर मांस की मांग होटल, ढाबा, प्रोसेसिंग यूनिट और स्थानीय बाज़ारों में लगातार बढ़ रही है। एक सूअर से 8–10 हज़ार रुपये तक की आय संभव है, जिससे सालाना अच्छा मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है।

सूअर पालन कम पूंजी में अधिक लाभ देने वाला व्यवसाय है। उचित प्रबंधन, उन्नत नस्ल और बाज़ार से जुड़ाव के साथ यह ग्रामीण भारत की आर्थिक स्थिति को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


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