धमतरी: नगर निगम शाला क्रमांक–1 में महापुरुषों के छायाचित्रों का अपमान, कांग्रेस पार्षदों का जोरदार विरोध
धमतरी।
नगर पालिका निगम धमतरी के अंतर्गत आने वाली नगर निगम शाला क्रमांक–1 के तोड़फोड़ कार्य के दौरान महापुरुषों के छायाचित्रों के साथ घोर लापरवाही और अपमान का मामला सामने आया है। स्कूल भवन को तोड़ने से पूर्व वहां लगे महापुरुषों के छायाचित्रों को सुरक्षित रूप से हटाया नहीं गया, जिसके चलते वे टूट-फूट का शिकार हो गए और बाद में कचरे के ढेर में पड़े मिले।
घटना की जानकारी मिलते ही कांग्रेस के पार्षद एवं कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे, जहां उन्होंने देखा कि देश व समाज के लिए प्रेरणास्रोत रहे महापुरुषों की तस्वीरें कचरे में पड़ी हुई हैं। इस दृश्य को देखकर कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया।
महापुरुषों के छायाचित्रों को किया गया एकत्रित
कांग्रेस पार्षदों व कार्यकर्ताओं ने तत्परता दिखाते हुए कचरे में पड़ी सभी छायाचित्रों को एकत्र किया और उन्हें सम्मानपूर्वक धमतरी नगर निगम के महापौर रामू रोहरा के हाथों निगम प्रशासन को सौंपा।
इस दौरान महापौर द्वारा छायाचित्रों को व्यवस्थित एवं सुरक्षित रखने की बाते भी कही गई।
निगम प्रशासन पर दोबारा अपमान का आरोप
कांग्रेस पार्षदों का आरोप है कि महापौर के निर्देशों के बावजूद, बाद में नगर निगम प्रशासन द्वारा उन महापुरुषों के छायाचित्रों को पुनः कचरा वाहन में डाल दिया गया, जो कि न केवल असंवेदनशीलता दर्शाता है बल्कि महापुरुषों के सम्मान का सीधा अपमान है।
पार्षदों और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में आक्रोश
इस घटना के बाद कांग्रेस के पार्षदों एवं कार्यकर्ताओं में भारी रोष है। उनका कहना है कि महापुरुष किसी एक दल या वर्ग के नहीं, बल्कि पूरे समाज की धरोहर होते हैं। उनके छायाचित्रों के साथ इस प्रकार का व्यवहार अक्षम्य है।
कांग्रेस पार्षद व कार्यकर्ता ने स्पष्ट किया है कि—
कांग्रेसी पार्षद दीपक सोनकर वह कांग्रेसी कार्यकर्ता गौतम वाधवानी ने कहा कि यदि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की गई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति हुईतो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे। उन्होंने निगम प्रशासन से मांग की है कि महापुरुषों के छायाचित्रों को सम्मानपूर्वक सुरक्षित स्थान पर स्थापित किया जाए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो।
संवेदनशीलता की कमी पर सवाल
यह घटना नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली और संवेदनशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है। सार्वजनिक संस्थानों में महापुरुषों के छायाचित्र केवल सजावट नहीं, बल्कि संस्कार, इतिहास और सम्मान के प्रतीक होते हैं, जिनके संरक्षण की जिम्मेदारी प्रशासन की है।


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