पोल्ट्री फार्म : रोजगार, पोषण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार
पोल्ट्री फार्मिंग (मुर्गी पालन) भारत में तेजी से विकसित हो रहा एक महत्वपूर्ण कृषि-आधारित व्यवसाय है। कम पूंजी में शुरू होकर यह कम समय में अधिक लाभ देने वाला व्यवसाय है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, प्रोटीन युक्त आहार की उपलब्धता और किसानों की आय बढ़ाने में पोल्ट्री फार्म की अहम भूमिका है। वर्तमान समय में अंडा और चिकन की मांग देश-विदेश में लगातार बढ़ रही है।
पोल्ट्री फार्म क्या है
पोल्ट्री फार्म वह व्यवस्था है, जिसमें मुर्गी, चूजा, बत्तख या टर्की को वैज्ञानिक तरीके से पालन कर अंडा एवं मांस का उत्पादन किया जाता है। भारत में मुख्यतः मुर्गी पालन ही सबसे अधिक प्रचलित है।
पोल्ट्री फार्म के प्रमुख प्रकार
1. ब्रायलर पोल्ट्री फार्म
मांस (चिकन) उत्पादन के लिए
35–45 दिन में तैयार
तेजी से लाभ देने वाला व्यवसाय
2. लेयर पोल्ट्री फार्म
अंडा उत्पादन के लिए
18 सप्ताह बाद अंडा देना शुरू
72–78 सप्ताह तक अंडा उत्पादन
3. देशी मुर्गी पालन
कम लागत
जैविक (ऑर्गेनिक) मांग अधिक
ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक प्रचलित
पोल्ट्री फार्म शुरू करने की प्रक्रिया (स्टेप बाय स्टेप)
1. स्थान का चयन
आबादी से दूर
हवादार और ऊँची भूमि
जल निकासी की उचित व्यवस्था
बिजली एवं पानी की उपलब्धता
2. शेड (शाला) का निर्माण
पूर्व-पश्चिम दिशा में
प्रति मुर्गी 1–1.5 वर्गफुट स्थान
टीन या सीमेंट की छत
पर्याप्त रोशनी और वेंटिलेशन
3. नस्ल का चयन
ब्रायलर नस्लें:
Cobb-400
Ross-308
Vencobb
लेयर नस्लें:
White Leghorn
BV-300
Hy-Line
4. चूजों की खरीद
प्रमाणित हैचरी से
स्वस्थ, सक्रिय और समान आकार के चूजे
टीकाकरण प्रमाण पत्र अनिवार्य
5. आहार प्रबंधन
मुर्गियों के लिए संतुलित आहार अत्यंत आवश्यक है।
आहार के चरण:
स्टार्टर फीड (0–14 दिन)
ग्रोवर फीड (15–28 दिन)
फिनिशर फीड (29 दिन के बाद)
> मक्का, सोयाबीन, चोकर, खनिज मिश्रण एवं विटामिन शामिल किए जाते हैं।
6. स्वास्थ्य एवं टीकाकरण
मुर्गियों को बीमारियों से बचाने हेतु नियमित टीकाकरण आवश्यक है।
प्रमुख टीके:
• रानीखेत रोग
• गंबोरो
• फाउल पॉक्स
• मैरेक्स
7. साफ-सफाई एवं प्रबंधन
• प्रतिदिन शेड की सफाई
• गीले कचरे को हटाना
• पीने के पानी की स्वच्छता
• मृत मुर्गियों का वैज्ञानिक निपटान
उत्पादन और विपणन
• ब्रायलर: 2–2.5 किलोग्राम वजन
• लेयर: 280–300 अंडे प्रति मुर्गी प्रति वर्ष
बिक्री:
• स्थानीय बाजार
• होटल-रेस्टोरेंट
• थोक व्यापारी
• पोल्ट्री कंपनियाँ
लागत और लाभ (अनुमान)
• 1000 ब्रायलर मुर्गी यूनिट
• कुल लागत: ₹1.2–1.5 लाख
• अवधि: 40–45 दिन
• शुद्ध लाभ: ₹30,000–50,000 प्रति बैच
• वर्ष में 5–6 बैच संभव
सरकारी योजनाएँ एवं अनुदान
भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा पोल्ट्री फार्म को बढ़ावा देने हेतु कई योजनाएँ संचालित की जा रही हैं:
• नाबार्ड सब्सिडी योजना (25–33%)
• राष्ट्रीय पशुधन मिशन
• मुख्यमंत्री पशुपालन योजना
• बैंक ऋण सुविधा
• प्रशिक्षण कार्यक्रम (केवीके, पशुपालन विभाग)
रोजगार और सामाजिक महत्व
• ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार
• महिलाओं की भागीदारी
• पोषण सुरक्षा में वृद्धि
• किसानों की आय दोगुनी करने में सहायक
पोल्ट्री फार्म एक ऐसा व्यवसाय है जो कम समय में अधिक लाभ, निरंतर आय और रोजगार प्रदान करता है। वैज्ञानिक प्रबंधन, उचित प्रशिक्षण और सरकारी सहयोग से यह व्यवसाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन सकता है। आने वाले समय में पोल्ट्री उद्योग भारत के कृषि क्षेत्र में एक मजबूत स्तंभ के रूप में उभर रहा है।

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