देसी मुर्गी पालन : आत्मनिर्भर भारत की ओर एक मजबूत कदम
देश में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच देसी मुर्गी पालन ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में कम लागत में अधिक लाभ देने वाला व्यवसाय बनकर उभरा है। देसी मुर्गियों के अंडे और मांस की मांग शहरी बाजारों तक में तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि यह स्वादिष्ट, पौष्टिक और औषधीय गुणों से भरपूर माने जाते हैं।
देसी मुर्गी पालन क्या है?
देसी मुर्गी पालन का अर्थ है ऐसी मुर्गियों का पालन जो भारतीय जलवायु के अनुकूल, रोग प्रतिरोधक क्षमता से भरपूर और कम देखभाल में भी जीवित रहने में सक्षम हों। ये मुर्गियां खुले वातावरण में चरती हैं और प्राकृतिक आहार पर भी अच्छी वृद्धि करती हैं।
देसी मुर्गी पालन की प्रमुख विशेषताएं
कम लागत में पालन
कम बीमारी और कम दवाइयों की जरूरत
अंडे और मांस की ऊंची बाजार कीमत
घरेलू कचरे और प्राकृतिक आहार पर भी पालन संभव
महिलाओं व युवाओं के लिए रोजगार का सशक्त माध्यम
देसी मुर्गी पालन की विधि (स्टेप-बाय-स्टेप)
1️⃣ नस्ल का चयन
स्थानीय जलवायु और बाजार मांग के अनुसार उपयुक्त नस्ल का चयन सबसे महत्वपूर्ण चरण है।
2️⃣ आवास व्यवस्था
प्रति मुर्गी 3–4 वर्गफुट स्थान
हवादार, सूखा और सुरक्षित शेड
वर्षा और ठंड से सुरक्षा आवश्यक
3️⃣ चूजों की देखभाल
शुरुआती 3–4 सप्ताह विशेष तापमान (32–35°C)
स्वच्छ पानी और संतुलित आहार
समय-समय पर टीकाकरण
4️⃣ आहार प्रबंधन
मक्का, बाजरा, ज्वार, चावल की भूसी
हरी सब्जियां, कीड़े-मकोड़े
कैल्शियम व खनिज मिश्रण
5️⃣ स्वास्थ्य प्रबंधन
रानीखेत, गंबोरो, फाउल पॉक्स के टीके
स्वच्छता पर विशेष ध्यान
उत्पादन क्षमता
एक देसी मुर्गी से 120–180 अंडे/वर्ष
अंडे का वजन: 45–55 ग्राम
5–6 माह में अंडा देना शुरू
लागत और लाभ (अनुमानित)
100 देसी मुर्गियों पर लागत: ₹25,000–30,000
वार्षिक आय: ₹60,000–90,000
शुद्ध लाभ: ₹35,000–55,000
भारत में प्रमुख उपयोगी देसी मुर्गी नस्लें
1. कड़कनाथ (मध्यप्रदेश)
काला मांस, उच्च प्रोटीन
मधुमेह व हृदय रोगियों के लिए उपयोगी
अत्यधिक मांग, ऊंची कीमत
2. असिल (उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश)
मजबूत शरीर, आक्रामक स्वभाव
मांस उत्पादन में उत्कृष्ट
3. घगूस (कर्नाटक)
अच्छी अंडा उत्पादन क्षमता
रोग प्रतिरोधक
4. चिटगोंग (पूर्वोत्तर भारत)
भारी वजन
स्वादिष्ट मांस
5. बसरा (पश्चिम बंगाल)
दलदली क्षेत्रों में अनुकूल
कम देखभाल में पालन संभव
6. नेकेड नेक (ग्रामीण भारत)
गर्म क्षेत्रों के लिए उपयुक्त
कम चारे में बेहतर वृद्धि
7. अरी (असम)
स्थानीय वातावरण के अनुकूल
अच्छा अंडा उत्पादन
सरकारी योजनाएं व सहायता
राष्ट्रीय पशुधन मिशन
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना
राज्य पशुपालन विभाग से सब्सिडी
केवीके (कृषि विज्ञान केंद्र) से प्रशिक्षण
बाजार मांग और भविष्य
स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण देसी अंडों की कीमत ₹12–20 प्रति अंडा तक पहुंच चुकी है। आने वाले वर्षों में ऑर्गेनिक और देसी उत्पादों की मांग और बढ़ने की संभावना है।
देसी मुर्गी पालन न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता प्रदान करता है, बल्कि पोषण सुरक्षा और ग्रामीण रोजगार को भी मजबूत करता है। सही प्रशिक्षण और योजना के साथ यह व्यवसाय हर वर्ग के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है।

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