अंडा उत्पादन: पोषण, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़
भारत में अंडा उत्पादन आज केवल एक कृषि गतिविधि नहीं, बल्कि पोषण सुरक्षा, स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला प्रमुख क्षेत्र बन चुका है। बढ़ती आबादी, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और प्रोटीन युक्त आहार की मांग के कारण अंडों की खपत में लगातार वृद्धि हो रही है।
भारत में अंडा उत्पादन की स्थिति
भारत विश्व के प्रमुख अंडा उत्पादक देशों में शामिल है।
- देश में प्रतिवर्ष 100 अरब से अधिक अंडों का उत्पादन होता है।
- आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और पंजाब प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।
- छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी पोल्ट्री फार्मिंग तेज़ी से बढ़ रही है।
अंडा उत्पादन क्या है?
अंडा उत्पादन मुर्गियों (लेयर नस्ल) के वैज्ञानिक पालन द्वारा व्यावसायिक रूप से अंडे प्राप्त करने की प्रक्रिया है। इसमें नस्ल चयन, संतुलित आहार, स्वास्थ्य प्रबंधन और आधुनिक तकनीक की अहम भूमिका होती है।
1️⃣ नस्ल का चयन
उच्च उत्पादन देने वाली लेयर नस्लें—
- व्हाइट लेघॉर्न
- हाई-लाइन
- लोहमैन ब्राउन
- ग्रामप्रिया (ग्रामीण क्षेत्रों हेतु)
2️⃣ पोल्ट्री शेड की व्यवस्था
- शेड हवादार, सूखा और साफ होना चाहिए
- तापमान: 18–30 डिग्री सेल्सियस
- प्रकाश व्यवस्था: 16–17 घंटे प्रकाश आवश्यक
3️⃣ चूजों का पालन (ब्रूडिंग)
- शुरुआती 0–6 सप्ताह अत्यंत महत्वपूर्ण
- संतुलित दाना, स्वच्छ पानी और ताप नियंत्रण जरूरी
4️⃣ आहार प्रबंधन
- मक्का, सोयाबीन, चोकर, खनिज मिश्रण
- कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा (अंडे के छिलके के लिए)
5️⃣ स्वास्थ्य एवं टीकाकरण
- रानीखेत, गम्बोरो, फाउल पॉक्स जैसे रोगों से बचाव
- नियमित टीकाकरण और साफ-सफाई
6️⃣ अंडा संग्रहण और विपणन
- प्रतिदिन 1–2 बार अंडा संग्रह
- ठंडी व सूखी जगह पर भंडारण
- स्थानीय बाजार, होटल, आंगनबाड़ी, थोक व्यापारी प्रमुख खरीदार
लागत और लाभ
- 1000 लेयर मुर्गियों से प्रतिदिन औसतन 800–900 अंडे
- वार्षिक शुद्ध लाभ: 2 से 3 लाख रुपये तक (अनुमानित)
- छोटे किसान भी कम पूंजी में शुरुआत कर सकते हैं
सरकार की योजनाएं व सहायता
- राष्ट्रीय पशुधन मिशन
- प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत ऋण
- सब्सिडी, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता
- पशुपालन विभाग द्वारा टीकाकरण व परामर्श
पोषण में अंडे का महत्व
- उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन
- विटामिन A, D, B12 और आयरन का अच्छा स्रोत
- बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए लाभकारी
अंडा उत्पादन न केवल स्वस्थ समाज की नींव है, बल्कि यह ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए स्थायी आय का मजबूत साधन भी है। यदि सरकार, किसान और बाजार के बीच बेहतर समन्वय हो, तो यह क्षेत्र आने वाले समय में और अधिक रोजगार एवं पोषण सुरक्षा प्रदान कर सकता है।

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