इमू पक्षी पालन: कम लागत में अधिक लाभ का उभरता व्यवसाय
इमू (Emu) पक्षी पालन भारत में तेजी से लोकप्रिय होता जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया मूल का यह विशालकाय पक्षी अपने मांस, तेल, चमड़ा, पंख और अंडों के कारण व्यावसायिक दृष्टि से अत्यंत लाभकारी माना जाता है। कम रोग, कम देखभाल और लंबे समय तक उत्पादन देने की क्षमता के कारण इमू पालन किसानों और उद्यमियों के लिए एक बेहतर विकल्प बन रहा है।
इमू पक्षी की प्रमुख विशेषताएं
- इमू एक उड़ान रहित पक्षी है
- ऊँचाई: लगभग 5–6 फीट
- वजन: 35–45 किलोग्राम
- आयु: 25–30 वर्ष
- प्रजनन क्षमता: 25–30 वर्ष तक
- अंडा उत्पादन: 30–50 अंडे प्रति वर्ष
- अंडे का वजन: लगभग 600–700 ग्राम
इमू पालन के लिए उपयुक्त जलवायु
इमू पक्षी भारतीय जलवायु के लिए अनुकूल है।
- अत्यधिक गर्मी व सर्दी दोनों सहन कर सकता है
- 10°C से 45°C तापमान में आसानी से पालन संभव
- शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्र अधिक उपयुक्त
इमू फार्म की स्थापना (स्टेप-बाय-स्टेप)
1. भूमि का चयन
- ऊँची व जल निकासी वाली भूमि
- शांत वातावरण, शहर से दूर
- 1 जोड़ी इमू के लिए लगभग 250–300 वर्गफुट स्थान
2. शेड व बाड़ व्यवस्था
- तार की मजबूत बाड़ (6 फीट ऊँची)
- खुला क्षेत्र + छायादार शेड
- फर्श कच्ची या रेतीली हो
3. चूजों की खरीद
- प्रमाणित इमू फार्म से ही खरीदें
- 3–4 माह के चूजे अधिक सुरक्षित
- नर–मादा अनुपात: 1:1
इमू पक्षी का आहार प्रबंधन
इमू शाकाहारी होते हैं—
मुख्य आहार
- मक्का
- गेहूं
- सोयाबीन
- चोकर
- हरी घास व सब्जियाँ
खर्च
- एक वयस्क इमू पर औसतन 25–30 रुपये प्रतिदिन
स्वास्थ्य एवं रोग प्रबंधन
इमू पक्षी अपेक्षाकृत रोग मुक्त होते हैं
- नियमित टीकाकरण
- स्वच्छ पानी की व्यवस्था
- समय-समय पर कृमिनाशक दवा
सामान्य रोग
- पाचन संबंधी समस्या
- चोट या तनाव
प्रजनन एवं अंडा उत्पादन
- प्रजनन आयु: 18–24 माह
- अंडा देने का समय: अक्टूबर से मार्च
- एक मादा 30–50 अंडे प्रति वर्ष
- अंडों से चूजे निकालने के लिए इनक्यूबेटर का उपयोग
इमू पालन से होने वाले उत्पाद
- इमू तेल – दवा व कॉस्मेटिक उद्योग में उपयोग
- मांस – प्रोटीन युक्त, कम कोलेस्ट्रॉल
- चमड़ा – जूते, बैग, बेल्ट
- पंख व नाखून – सजावटी उपयोग
- अंडे – हैचिंग व सजावट
लागत एवं लाभ का अनुमान
प्रारंभिक लागत (10 जोड़ी फार्म)
- भूमि व शेड: ₹2–3 लाख
- पक्षी खरीद: ₹4–5 लाख
- आहार व देखभाल: ₹1–2 लाख
संभावित आय
- एक जोड़ी से वार्षिक आय: ₹40,000–60,000
- 10 जोड़ी से वार्षिक आय: ₹4–6 लाख
- 2–3 वर्षों में लागत वसूली संभव
सरकारी सहायता एवं प्रशिक्षण
- राज्य पशुपालन विभाग
- कृषि विज्ञान केंद्र (KVK)
- मुद्रा योजना, PMEGP के अंतर्गत ऋण सुविधा
- प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन
बाजार एवं मांग
- दवा कंपनियाँ
- कॉस्मेटिक उद्योग
- होटल व प्रोसेसिंग यूनिट
- निर्यात की संभावनाएँ
इमू पक्षी पालन एक दीर्घकालीन, कम जोखिम और अधिक लाभ देने वाला व्यवसाय है। यदि इसे वैज्ञानिक पद्धति, सही प्रशिक्षण और बाजार की समझ के साथ किया जाए तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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