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ऋषि कपूर: रोमांस के चेहरे से सशक्त अभिनय तक – हिंदी सिनेमा का एक अमिट अध्याय

 

ऋषि कपूर: रोमांस के चेहरे से सशक्त अभिनय तक – हिंदी सिनेमा का एक अमिट अध्याय

लेखक - जयप्रकाश सिन्हा

हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जो केवल अभिनय नहीं करते, बल्कि अपने दौर की पहचान बन जाते हैं। ऋषि कपूर उन्हीं कलाकारों में से एक थे। एक ऐसे अभिनेता, जिन्होंने बाल कलाकार से लेकर रोमांटिक हीरो, फिर चरित्र अभिनेता और अंततः सशक्त सहायक भूमिकाओं तक का सफर पूरे आत्मविश्वास और गरिमा के साथ तय किया। कपूर खानदान की विरासत को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने न सिर्फ अपने नाम को स्थापित किया, बल्कि हिंदी सिनेमा को कई यादगार किरदार भी दिए।

ऋषि कपूर का नाम सुनते ही 70 और 80 के दशक का वह मासूम, चॉकलेटी चेहरा आंखों के सामने आ जाता है, जो प्रेम, संगीत और भावनाओं से भरी फिल्मों का पर्याय था। लेकिन उन्हें केवल रोमांटिक हीरो तक सीमित करना उनके साथ अन्याय होगा। अपने करियर के दूसरे दौर में उन्होंने यह साबित किया कि वे एक परिपक्व, गहरे और प्रभावशाली अभिनेता भी हैं।

जन्म और पारिवारिक विरासत

ऋषि कपूर का जन्म 4 सितंबर 1952 को मुंबई में हुआ। वे हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म परिवार कपूर खानदान से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता थे महान शोमैन राज कपूर, जिन्होंने भारतीय सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। माता कृष्णा राज कपूर थीं, और दादा पृथ्वीराज कपूर, जिन्होंने भारतीय रंगमंच और सिनेमा की नींव रखी।

ऐसे परिवार में जन्म लेने का अर्थ था कि सिनेमा उनके जीवन का स्वाभाविक हिस्सा था। कैमरे, लाइट्स और स्टूडियो उनके लिए किसी नई दुनिया जैसे नहीं थे, बल्कि बचपन की रोज़मर्रा की जिंदगी का हिस्सा थे।

बाल कलाकार के रूप में शुरुआत

ऋषि कपूर ने बहुत कम उम्र में अभिनय की दुनिया में कदम रखा। वर्ष 1970 में आई फिल्म “मेरा नाम जोकर” में उन्होंने राज कपूर के बचपन का किरदार निभाया। इस भूमिका के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (नेशनल अवॉर्ड) से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार इस बात का संकेत था कि कपूर परिवार की अगली पीढ़ी भी अभिनय में उतनी ही सक्षम है।

बाल कलाकार के रूप में उनकी मासूमियत और भावनात्मक गहराई ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।

बॉबी और एक सितारे का जन्म

साल 1973 में आई फिल्म “बॉबी” ने ऋषि कपूर को रातों-रात सुपरस्टार बना दिया। इस फिल्म में उनके साथ डिंपल कपाड़िया थीं। “बॉबी” केवल एक प्रेम कहानी नहीं थी, बल्कि यह युवा प्रेम, वर्ग भेद और सामाजिक सोच पर आधारित एक क्रांतिकारी फिल्म थी।

ऋषि कपूर का सरल, निश्छल और रोमांटिक अंदाज़ युवाओं का आदर्श बन गया। फिल्म के गाने आज भी सदाबहार माने जाते हैं। “बॉबी” ने उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर अवॉर्ड दिलाया और हिंदी सिनेमा को उसका नया रोमांटिक हीरो मिल गया।

रोमांटिक हीरो का स्वर्णिम दौर

1970 और 80 के दशक में ऋषि कपूर रोमांस के सबसे बड़े चेहरे बन गए। उन्होंने उस दौर में लगभग हर सफल अभिनेत्री के साथ काम किया।

उनकी प्रमुख रोमांटिक फिल्मों में शामिल हैं:

• चांदनी

• कर्ज़

• प्रेम रोग

• सागर

• नागिन

• लैला मजनूं

• दामिनी

• अमर अकबर एंथनी


ऋषि कपूर की खासियत थी उनका भावुक चेहरा, आंखों में ईमानदारी और संवाद अदायगी में सहजता। वे पर्दे पर प्रेम को बनावटी नहीं, बल्कि स्वाभाविक रूप में प्रस्तुत करते थे।

नीतू कपूर के साथ जोड़ी

ऋषि कपूर और नीतू सिंह (नीतू कपूर) की जोड़ी हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय जोड़ियों में से एक रही। दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया और उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को दर्शकों ने खूब पसंद किया।

1980 में दोनों ने विवाह किया। शादी के बाद नीतू कपूर ने फिल्मों से दूरी बना ली और परिवार को प्राथमिकता दी। ऋषि कपूर अपने साक्षात्कारों में अक्सर कहते थे कि नीतू उनके जीवन की सबसे बड़ी ताकत हैं।

कर्ज़: एक अलग पहचान

फिल्म “कर्ज़” (1980) ऋषि कपूर के करियर की मील का पत्थर मानी जाती है। पुनर्जन्म पर आधारित इस फिल्म में उन्होंने दोहरे किरदार निभाए। फिल्म का संगीत, कहानी और ऋषि कपूर का अभिनय आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय है।

“एक हसीना थी” और “ओम शांति ओम” जैसे गाने आज भी सदाबहार हैं।

समय के साथ बदलता अभिनेता

90 के दशक में हिंदी सिनेमा का स्वरूप बदलने लगा। नए अभिनेता आए और रोमांटिक हीरो की छवि धीरे-धीरे पीछे छूटने लगी। लेकिन ऋषि कपूर ने खुद को समय के अनुसार ढाल लिया।

उन्होंने चरित्र अभिनेता के रूप में नई पारी शुरू की और यहां भी उन्होंने अपनी गहरी छाप छोड़ी।

दूसरी पारी: सशक्त किरदारों का दौर

ऋषि कपूर की दूसरी पारी कई मायनों में पहली से भी अधिक प्रशंसनीय रही। उन्होंने नकारात्मक, ग्रे और जटिल किरदारों को बेझिझक स्वीकार किया।

उनकी प्रमुख फिल्मों में शामिल हैं:

• अग्निपथ (2012) – खलनायक

• दो दूनी चार

• मुल्क

• राज़ी

• 102 नॉट आउट

• कपूर एंड सन्स


“मुल्क” में उनका किरदार एक ऐसे पिता का था, जो देशभक्ति और सामाजिक पूर्वाग्रह के बीच संघर्ष करता है। इस फिल्म के लिए उनके अभिनय की खूब सराहना हुई।

102 नॉट आउट: उम्र से परे अभिनय

अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म “102 नॉट आउट” में ऋषि कपूर ने 75 वर्षीय बेटे का किरदार निभाया। यह फिल्म जीवन, उम्र और रिश्तों पर आधारित थी। ऋषि कपूर का अभिनय संवेदनशील, हास्यपूर्ण और भावनात्मक था।

व्यक्तित्व और बेबाकी

ऋषि कपूर सिर्फ एक अभिनेता ही नहीं, बल्कि एक बेबाक व्यक्तित्व भी थे। वे सोशल मीडिया पर अपने विचार खुलकर रखते थे, चाहे वह राजनीति हो, समाज हो या फिल्म इंडस्ट्री। उनकी स्पष्टवादिता कभी-कभी विवादों का कारण भी बनी, लेकिन उन्होंने कभी अपने विचारों से समझौता नहीं किया।

बीमारी और संघर्ष

2018 में ऋषि कपूर को कैंसर होने की जानकारी सामने आई। वे इलाज के लिए अमेरिका गए और करीब एक साल तक वहां रहे। इलाज के बाद वे भारत लौटे और फिर से फिल्मों में सक्रिय हुए।

बीमारी के दौरान भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने प्रशंसकों को सकारात्मक संदेश देते रहे।

निधन और विरासत

30 अप्रैल 2020 को ऋषि कपूर का निधन हो गया। उनके जाने से हिंदी सिनेमा ने एक बहुआयामी कलाकार को खो दिया। फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों के लिए यह एक अपूरणीय क्षति थी।

सम्मान और उपलब्धियां

• नेशनल फिल्म अवॉर्ड

• फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर अवॉर्ड

• फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड


ऋषि कपूर: हमेशा ज़िंदा एक कलाकार

ऋषि कपूर भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके किरदार, गाने और संवाद आज भी दर्शकों के दिलों में ज़िंदा हैं। उन्होंने यह साबित किया कि सच्चा कलाकार वही है, जो समय के साथ खुद को बदलता है, लेकिन अपनी ईमानदारी नहीं छोड़ता।

हिंदी सिनेमा के इतिहास में ऋषि कपूर का नाम हमेशा सम्मान और प्रेम के साथ लिया जाएगा — एक अभिनेता, एक सितारा और एक सच्चा इंसान।

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