खरगोश पालन:
भारत में कृषि के साथ-साथ पशुपालन भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनता जा रहा है। हाल के वर्षों में खरगोश पालन (Rabbit Farming) एक ऐसे वैकल्पिक व्यवसाय के रूप में उभरा है, जिसमें कम पूंजी, कम स्थान और कम समय में अच्छा मुनाफ़ा संभव है। विशेषकर युवाओं, महिलाओं और छोटे किसानों के लिए यह एक लाभकारी स्वरोज़गार का माध्यम बन रहा है।
खरगोश पालन क्या है?
खरगोश पालन का अर्थ है खरगोशों को वैज्ञानिक तरीके से मांस, ऊन, पालतू पशु या प्रजनन के उद्देश्य से पालना। खरगोश तेज़ी से बढ़ने वाले, अधिक प्रजनन क्षमता वाले और कम आहार में पलने वाले पशु हैं।
भारत में खरगोश पालन की संभावनाएं
बढ़ती प्रोटीन युक्त मांस की मांग
शहरी क्षेत्रों में पालतू खरगोश की लोकप्रियता
खरगोश का मांस कम वसा व कोलेस्ट्रॉल युक्त
महिलाओं के लिए घर से किया जा सकने वाला व्यवसाय
सीमित भूमि वाले किसानों के लिए उपयुक्त
प्रमुख नस्लें (Breeds)
भारत में पाली जाने वाली प्रमुख नस्लें—
नस्ल विशेषता
• न्यूजीलैंड व्हाइट तेज़ वृद्धि, मांस के लिए श्रेष्ठ
• कैलिफोर्नियन उच्च मांस उत्पादन
• ग्रे जाइंट बड़ा आकार, अधिक वजन
• सोवियत चिंचिला ऊन और मांस दोनों के लिए
• डच पालतू व सजावटी
आवास व्यवस्था (Housing)
• खरगोशों को सूखी, हवादार और ठंडी जगह चाहिए
• पिंजरे ज़मीन से 2–3 फीट ऊपर हों
• प्रति खरगोश लगभग 4–5 वर्ग फीट स्थान
• गर्मी से बचाव के लिए छाया और पानी आवश्यक
आहार प्रबंधन
खरगोश शाकाहारी होते हैं—
हरा चारा:
नेपियर घास
बरसीम
गाजर, मूली की पत्तियाँ
सूखा आहार:
दाना (Pellet Feed)
गेहूं, जौ, मक्का
खली (सरसों/सोयाबीन)
➡️ स्वच्छ पानी हमेशा उपलब्ध रहे।
प्रजनन क्षमता
• मादा खरगोश 4–5 महीने में प्रजनन योग्य
• गर्भकाल: 30–32 दिन
• एक बार में 6–10 बच्चे
• वर्ष में 5–6 बार बच्चे देने की क्षमता
👉 यही कारण है कि खरगोश पालन अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
प्रमुख रोग एवं बचाव
रोग लक्षण बचाव
• डायरिया दस्त, कमजोरी साफ-सफाई, संतुलित आहार
• स्नफल नाक से पानी हवादार स्थान
• त्वचा रोग खुजली, बाल झड़ना नियमित सफाई
• हीट स्ट्रोक सुस्ती गर्मी से बचाव
➡️ समय-समय पर पशु चिकित्सक से परामर्श आवश्यक।
लागत एवं लाभ (अनुमानित)
• शुरुआती लागत (10 मादा + 2 नर):
• पिंजरा व उपकरण: ₹15,000
• खरगोश खरीद: ₹12,000
• आहार व देखभाल: ₹8,000
➡️ कुल: लगभग ₹35,000
वार्षिक आमदनी:
खरगोश बिक्री/मांस/पालतू: ₹80,000 – ₹1,20,000
➡️ शुद्ध लाभ: ₹45,000 – ₹80,000 (पहले वर्ष में)
सरकारी सहायता
• राष्ट्रीय पशुधन मिशन
• स्वयं सहायता समूहों को अनुदान
• प्रशिक्षण कार्यक्रम (कृषि विज्ञान केंद्र)
• बैंक ऋण व सब्सिडी योजनाएं
खरगोश पालन आज के समय में कम जोखिम और अधिक लाभ वाला व्यवसाय है। सही प्रशिक्षण, वैज्ञानिक पद्धति और बाज़ार से जुड़ाव के साथ यह ग्रामीण भारत में आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह खोल सकता है। विशेष रूप से युवा वर्ग और महिलाएं इस व्यवसाय से बेहतर भविष्य बना सकते हैं।

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