शिवजी की आरती एवं पूजन विधि
--------- शिवजी की पूजन विधि -------
पूजन का शुभ समय
प्रातःकाल स्नान के बाद या प्रदोष काल / सोमवार
महाशिवरात्रि पर विशेष फलदायी
आवश्यक सामग्री
शिवलिंग या भगवान शिव की मूर्ति
जल, दूध, दही, घी, शहद (पंचामृत)
बेलपत्र, धतूरा, भस्म
सफेद फूल, अक्षत
धूप, दीप, नैवेद्य (फल/मिठाई)
----------पूजन क्रम--------
आचमन व संकल्प – मन शुद्ध कर संकल्प लें।
अभिषेक – शिवलिंग पर जल, फिर पंचामृत से अभिषेक करें।
शुद्धि – पुनः जल चढ़ाएँ।
अर्चना – बेलपत्र (तीन पत्तों वाला), धतूरा, भस्म, सफेद फूल अर्पित करें।
मंत्र जप –
“ॐ नमः शिवाय” (108 बार)
धूप-दीप – धूप और दीप अर्पित करें।
नैवेद्य – फल/मिठाई चढ़ाएँ।
आरती – श्रद्धा से शिवजी की आरती करें।
प्रार्थना – सुख-शांति व कल्याण की कामना करें।
----------- शिवजी की आरती----------
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
तीनों रूप निरखता त्रिभुवन जन मोहे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी।
चन्दन मृगमद सोहे भाले शशिधारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक ब्रह्मादिक भूतादिक संगे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूल धर्ता।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुण स्वामी जी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
----------------- विशेष सुझाव--------------
बेलपत्र अर्पण करते समय “ॐ नमः शिवाय” अवश्य जपें।
अभिषेक में ताम्र/पीतल पात्र का प्रयोग श्रेष्ठ माना जाता है।
सोमवार, प्रदोष और महाशिवरात्रि पर उपवास व रुद्राभिषेक विशेष फल देता है।
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NEWS MiTAN BANDHU


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