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शनि देव जी की पूजन आरती


शनि देव जी की पूजन विधि 



-------पूजन का शुभ समय--------

शनिवार को, विशेषकर संध्या काल या प्रातः काल

अमावस्या या शनि जयंती पर विशेष फलदायी


------------- पूजन सामग्री---------

शनि देव की मूर्ति या चित्र

सरसों का तेल

काले तिल

काले फूल (काला गुलाब / आक)

काला कपड़ा

धूप, दीप

नीले फूल

गुड़ या काले चने

लोहा या लोहे की कील (इच्छानुसार)

प्रसाद


 ---------------पूजन विधि--------------

स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें

पूजा स्थान को साफ कर शनि देव की प्रतिमा स्थापित करें

सरसों के तेल का दीपक जलाएं

शनि देव को काले तिल, काले फूल अर्पित करें

लोहे पर या पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है

ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का 108 बार जप करें

अंत में शनि देव की आरती करें

प्रसाद वितरण करें


------------ शनि देव जी का मंत्र------------

ॐ शं शनैश्चराय नमः।


------------ शनि देव जी की आरती-------

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥

श्याम अंक वक्र दृष्टि चतुर्भुजा धारी।
नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥

किरिट मुकुट शीश सहज दीपत है लिलारी।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥

कोटि रत्न जड़ित सिंहासन पर बैठे।
छाया सहित शनिदेव की छवि अति सुंदर देखे॥

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥

------------- विशेष लाभ-------------

शनि दोष, साढ़ेसाती व ढैय्या में राहत

जीवन में स्थिरता, न्याय और कर्मों का शुभ फल

भय, रोग व बाधाओं से मुक्ति

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