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बटेर पालन


बटेर पालन : 


ग्रामीण स्वरोज़गार और पोषण सुरक्षा का सशक्त माध्यम

भारत में पशुपालन के क्षेत्र में बटेर पालन (Quail Farming) एक तेजी से उभरता हुआ व्यवसाय बनता जा रहा है। कम पूंजी, कम स्थान, कम समय में उत्पादन और अधिक लाभ के कारण यह व्यवसाय छोटे किसानों, युवाओं, महिलाओं एवं स्वरोज़गार की तलाश कर रहे लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहा है। बटेर के अंडे और मांस पोषण से भरपूर होने के कारण इसकी मांग शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में निरंतर बढ़ रही है।

बटेर क्या है?

बटेर एक छोटा आकार का पक्षी है, जो मुर्गी प्रजाति से संबंधित होता है। इसका वैज्ञानिक नाम Coturnix coturnix है। यह पक्षी तेज़ी से बढ़ता है और लगभग 6–7 सप्ताह में अंडा देना शुरू कर देता है।


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बटेर पालन की प्रमुख नस्लें

भारत में मुख्य रूप से निम्न नस्लों का पालन किया जाता है—

1. जापानी बटेर (Japanese Quail) – अंडा व मांस उत्पादन के लिए सर्वाधिक लोकप्रिय

2. व्हाइट बटेर – अधिक वजन और बेहतर मांस गुणवत्ता

3. ब्राउन बटेर – मजबूत एवं कम रोगग्रस्त


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बटेर पालन के लिए आवश्यक स्थान व ढांचा

• बटेर पालन छोटे कमरे, शेड या छत पर भी किया जा सकता है

• 1 वर्ग फुट में 4–5 बटेर रखे जा सकते हैं

• जालीदार पिंजरे या मल्टी-डेक केज प्रणाली अधिक उपयुक्त

• उचित वेंटिलेशन और रोशनी आवश्यक


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खान-पान एवं देखभाल

• बटेर को संतुलित दाना (प्रोटीन 22–24%) दिया जाता है

• साफ पानी की निरंतर उपलब्धता आवश्यक

• पहले 15 दिन विशेष देखभाल की जरूरत

• तापमान 35°C से धीरे-धीरे 24°C तक लाना चाहिए

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अंडा उत्पादन

• बटेर 6–7 सप्ताह में अंडा देना शुरू करता है

• एक बटेर वर्ष में लगभग 250–300 अंडे देता है

• बटेर का अंडा आकार में छोटा लेकिन पोषण में अत्यधिक समृद्ध होता है


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बटेर मांस की विशेषताएं

• कम वसा, अधिक प्रोटीन

• हृदय रोग व मधुमेह रोगियों के लिए उपयोगी

• होटल, रेस्टोरेंट और मेडिकल न्यूट्रिशन सेक्टर में मांग


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रोग प्रबंधन

• बटेर में रोग अपेक्षाकृत कम होते हैं

• साफ-सफाई से 90% रोगों से बचाव संभव

• समय-समय पर टीकाकरण और दवा जरूरी


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लागत व मुनाफा (अनुमानित)

• 1000 बटेर पालन की प्रारंभिक लागत: ₹40,000–₹50,000

• 2–3 महीने में उत्पादन शुरू

• मासिक शुद्ध लाभ: ₹20,000–₹30,000 तक संभव


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 सरकारी सहायता व प्रशिक्षण

• पशुपालन विभाग द्वारा प्रशिक्षण

• स्वयं सहायता समूहों को अनुदान

• बैंक ऋण एवं सब्सिडी योजनाएं उपलब्ध

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• बाजार और बिक्री

• स्थानीय बाजार

• होटल व ढाबे

• मेडिकल स्टोर (अंडे)

• ऑनलाइन प्लेटफॉर्म

बटेर पालन कम जोखिम वाला, कम पूंजी में शुरू होने वाला और शीघ्र लाभ देने वाला व्यवसाय है। यदि इसे वैज्ञानिक तरीके से किया जाए तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बढ़ती मांग और बेहतर बाजार संभावनाओं के चलते बटेर पालन भविष्य का लाभकारी व्यवसाय बनकर उभर रहा है।


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