अरहर (तुअर) की खेती
1. परिचय
अरहर (Pigeon Pea) भारत की प्रमुख दलहनी फसल है। इसे तुअर या तूर दाल के नाम से भी जाना जाता है। यह फसल प्रोटीन का मुख्य स्रोत है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी सहायक होती है। भारत विश्व का सबसे बड़ा अरहर उत्पादक देश है।
2. अरहर का वानस्पतिक परिचय
- वैज्ञानिक नाम: Cajanus cajan
- परिवार: Fabaceae
- फसल का प्रकार: दलहनी फसल
- फसल अवधि: 150–180 दिन (किस्म पर निर्भर)
3. जलवायु एवं तापमान
- अरहर खरीफ की फसल है
- उपयुक्त तापमान: 25°C – 35°C
- वर्षा: 600–1000 मिमी
- अधिक नमी और पाला फसल के लिए हानिकारक होता है
4. उपयुक्त भूमि
- दोमट एवं हल्की काली मिट्टी सर्वोत्तम
- जल निकास अच्छा होना चाहिए
- मिट्टी का pH: 6.5 – 7.5
- क्षारीय और जलभराव वाली भूमि अनुपयुक्त
5. उन्नत किस्में
| किस्म | अवधि | विशेषता |
|---|---|---|
| Asha (ICPL-87119) | 160 दिन | अधिक उत्पादन |
| UPAS-120 | 140 दिन | जल्दी पकने वाली |
| BSMR-736 | 170 दिन | रोग प्रतिरोधक |
| मालवीय तुअर | 150 दिन | उत्तर भारत हेतु |
| नरेंद्र अरहर-1 | 160 दिन | उच्च गुणवत्ता |
6. खेत की तैयारी
- 2–3 गहरी जुताई
- पाटा लगाकर खेत समतल करें
- अंतिम जुताई में गोबर की खाद मिलाएं
7. बुवाई का समय एवं विधि
- बुवाई समय: जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई मध्य तक
- बीज दर:
- देर से पकने वाली: 12–15 किग्रा/हेक्टेयर
- जल्दी पकने वाली: 18–20 किग्रा/हेक्टेयर
- कतार दूरी: 60–75 सेमी
- पौधा दूरी: 20–30 सेमी
- बीज को राइजोबियम कल्चर से उपचारित करें
8. खाद एवं उर्वरक प्रबंधन
| उर्वरक | मात्रा (किग्रा/हे.) |
|---|---|
| नाइट्रोजन | 20 |
| फास्फोरस | 40–50 |
| पोटाश | 20 |
| गोबर खाद | 5–8 टन |
अरहर स्वयं नाइट्रोजन स्थिरीकरण करती है
9. सिंचाई प्रबंधन
- वर्षा आधारित फसल
- आवश्यकता पड़ने पर 2–3 सिंचाई
- फूल और दाना भरने के समय सिंचाई आवश्यक
10. खरपतवार नियंत्रण
- बुवाई के 20–25 दिन बाद निराई-गुड़ाई
- आवश्यकता अनुसार 2 बार निराई
- पेंडिमेथालिन का सीमित उपयोग किया जा सकता है
11. प्रमुख रोग एवं कीट
रोग
- उकठा रोग
- झुलसा रोग
- मोजेक वायरस
कीट
- फली छेदक
- माहू
- सफेद मक्खी
नियंत्रण:
- रोगरोधी किस्में
- जैविक कीटनाशक (नीम तेल)
- आवश्यकता पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह से रसायन
12. कटाई एवं मड़ाई
- फली सूखने पर कटाई
- धूप में सुखाकर मड़ाई
- नमी 10–12% होनी चाहिए
13. उत्पादन एवं उपज
- औसत उपज: 12–20 क्विंटल/हेक्टेयर
- उन्नत तकनीक से 25 क्विंटल तक संभव
14. अरहर के लाभ
- उच्च प्रोटीन (20–22%)
- मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है
- कम लागत, अधिक लाभ
- पशु चारा भी प्राप्त होता है
- किसानों की आय बढ़ाने में सहायक
15. अरहर से बनने वाले उत्पाद
- तुअर दाल
- बेसन
- पापड़
- चारा
- जैविक खाद
16. लागत एवं लाभ (अनुमान)
| विवरण | राशि (₹/हे.) |
|---|---|
| कुल लागत | 25,000–30,000 |
| उत्पादन मूल्य | 70,000–90,000 |
| शुद्ध लाभ | 40,000–60,000 |
अरहर की खेती कम लागत में अधिक लाभ देने वाली फसल है। यह न केवल पोषण सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वैज्ञानिक विधि और उन्नत किस्मों के प्रयोग से किसान अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं।

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