माँ महाकाली आरती पूजन
महाकाली माता शक्ति, साहस और विनाश से रक्षा की देवी हैं। इनकी पूजा से भय, नकारात्मकता और शत्रु बाधा का नाश होता है।
महाकाली माता पूजन विधि
🔸 पूजन का शुभ समय
अमावस्या, अष्टमी, नवमी
विशेषकर कालरात्रि, नवरात्रि एवं शनिवार को
आवश्यक पूजन सामग्री
काले या लाल वस्त्र
महाकाली माता की मूर्ति/चित्र
कुमकुम, चंदन, अक्षत
लाल फूल / गुड़हल
धूप, दीप, कपूर
फल, मिठाई या गुड़
पंचामृत
नारियल
काला तिल (विशेष)
पूजन विधि (क्रमवार)
स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान की सफाई करें।
चौकी पर महाकाली माता की मूर्ति/चित्र स्थापित करें।
दीप प्रज्वलित कर संकल्प लें।
माता को कुमकुम, चंदन, अक्षत और फूल अर्पित करें।
पंचामृत से अभिषेक करें (यदि संभव हो)।
धूप-दीप अर्पण करें।
निम्न मंत्र का जप करें:
ॐ क्रीं कालीकायै नमः। (108 बार)
भोग अर्पित करें।
अंत में महाकाली आरती करें।
क्षमा प्रार्थना कर प्रसाद वितरित करें।
महाकाली माता की आरती
जय काली जय महाकाली,
जय कालिका माता।
भय हरनी दुःख दारिणी,
त्रैलोक्य की त्राता॥
दुष्ट संहारिणी करुणामयी,
शक्ति स्वरूपा माता।
रक्त बीज का नाश किया,
जग में महिमा गाता॥
चंड-मुंड का मर्दन कर,
धरा को शांति दी।
भक्तों के संकट हरती,
ममता की मूरत बनी॥
काली नाम की महिमा गाओ,
मन से भक्ति भाव।
जो जन शरण तुम्हारी आया,
उसका कर कल्याण॥
जय काली जय महाकाली,
जय कालिका माता।
विशेष लाभ
भय, रोग और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा
आत्मबल और साहस की वृद्धि
शत्रु बाधा एवं तंत्र बाधा से मुक्ति
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NEWS MiTAN BANDHU


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