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केकड़ा पालन

 केकड़ा पालन : संभावनाओं से भरपूर लाभकारी व्यवसाय

भारत में मत्स्य एवं जलीय कृषि क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। इसी क्रम में केकड़ा पालन (Crab Farming) एक उभरता हुआ और अत्यंत लाभकारी व्यवसाय बनकर सामने आया है। विशेषकर तटीय एवं नदी-नालों वाले क्षेत्रों में केकड़ा पालन किसानों और उद्यमियों के लिए आय का नया स्रोत सिद्ध हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में केकड़ों की भारी मांग के कारण इसका आर्थिक महत्व लगातार बढ़ रहा है।


केकड़ा पालन क्या है

केकड़ा पालन का अर्थ है नियंत्रित वातावरण में केकड़ों का वैज्ञानिक ढंग से पालन-पोषण करना। भारत में मुख्य रूप से मड क्रैब (Scylla serrata) और ब्लू क्रैब का पालन किया जाता है। मड क्रैब को सबसे अधिक पसंद किया जाता है क्योंकि इसकी बाजार कीमत अधिक होती है।


केकड़ा पालन के लिए उपयुक्त क्षेत्र

• तटीय क्षेत्र (ओडिशा, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल)

• नदी, नहर और बैकवाटर वाले क्षेत्र

• खारे एवं अर्ध-खारे पानी वाले इलाके

छत्तीसगढ़, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी तालाब आधारित केकड़ा पालन की संभावनाएं बढ़ रही हैं।


पालन की विधि

1. तालाब/हैचरी का चयन – 0.1 से 1 हेक्टेयर आकार का तालाब उपयुक्त माना जाता है।

2. जल गुणवत्ता – पानी की गहराई 1–1.5 मीटर, पीएच 7.5–8.5 होना चाहिए।

3. बीज (सीड) का चयन – स्वस्थ और सक्रिय केकड़ों का चयन आवश्यक है।

4. आहार व्यवस्था – मछली के अवशेष, घोंघे, झींगे और कृत्रिम फीड दिया जाता है।

5. देखभाल – नियमित जल परिवर्तन, ऑक्सीजन की व्यवस्था और रोग नियंत्रण जरूरी है।


उत्पादन अवधि

केकड़ा पालन की अवधि लगभग 4 से 6 महीने होती है। इस अवधि में केकड़े 500 ग्राम से 1 किलोग्राम तक वजन के हो जाते हैं।


लागत और मुनाफा

• प्रारंभिक लागत: 1 हेक्टेयर तालाब के लिए लगभग 2–3 लाख रुपये

• उत्पादन: 2–3 टन प्रति चक्र

• बिक्री मूल्य: 600 से 1200 रुपये प्रति किलोग्राम (गुणवत्ता व बाजार पर निर्भर)

• शुद्ध लाभ: 4–6 लाख रुपये प्रति चक्र तक संभव


बाजार और निर्यात संभावना

केकड़ों की मांग देश के बड़े शहरों के साथ-साथ चीन, सिंगापुर, मलेशिया और यूरोप में भी है। निर्यात के कारण केकड़ा पालन किसानों को विदेशी मुद्रा अर्जित करने का अवसर देता है।


सरकारी सहायता

केंद्र एवं राज्य सरकारें केकड़ा पालन को बढ़ावा देने के लिए:

• प्रशिक्षण कार्यक्रम

• अनुदान और ऋण सुविधा

• मत्स्य विभाग के माध्यम से तकनीकी मार्गदर्शन

केकड़ा पालन कम समय में अधिक लाभ देने वाला व्यवसाय है। यदि वैज्ञानिक तरीके से पालन किया जाए और बाजार से सीधा जुड़ाव रखा जाए, तो यह ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो सकता है।




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