NEWS MiTAN BANDHU

Top News

संतोषी माता आरती एवं पूजन विधि

 

संतोषी माता – पूजन विधि एवं आरती 



हिंदू मान्यता के अनुसार संतोषी माता, भगवान गणेश जी की पुत्री मानी जाती हैं। गणेश जी के दो पुत्र शुभ और लाभ हैं। एक बार उन्होंने अपनी बहन की इच्छा प्रकट की। तब गणेश जी की दिव्य कृपा से संतोषी माता का प्राकट्य हुआ, जिनका स्वरूप संतोष, धैर्य और सरलता का प्रतीक है।

संतोषी माता का नाम ही बताता है कि वे संतोष में सुख का संदेश देती हैं। जो भक्त सच्चे मन से माता की पूजा करता है, वह जीवन की परेशानियों से मुक्त होकर शांति और समृद्धि प्राप्त करता है।

===============================


 संतोषी माता पूजन विधि (शुक्रवार व्रत)

पूजन का दिन: शुक्रवार
व्रत प्रारंभ: शुक्ल पक्ष का शुक्रवार
व्रत अवधि: 16 या 21 शुक्रवार

🪔 पूजन सामग्री

संतोषी माता की मूर्ति या चित्र

लाल या पीला वस्त्र

गुड़ और चना (भोग हेतु)

अक्षत, फूल, धूप, दीप

नारियल

जल, रोली


🪔 पूजन विधि

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।

पूजा स्थल को शुद्ध करें और माता का चित्र स्थापित करें।

माता को लाल/पीला वस्त्र अर्पित करें।

गुड़-चना का भोग लगाएँ (खट्टे पदार्थ वर्जित हैं)।

माता का ध्यान कर व्रत कथा पढ़ें या सुनें।

अंत में आरती करें और क्षमा प्रार्थना करें।


ध्यान रखें: व्रत के दिन खट्टा न खाएँ और न ही किसी को दें।

🌼 संतोषी माता की आरती

जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता। 

अपने सेवक जन की सुख संपत्ति दाता॥

 सुंदर चीर सुनहरी माँ धारण कीन्हों। 

हीरा पन्ना दमके तन श्रृंगार लीन्हों॥ 

गेरू लाल छटा छवि बदन कमल सोहे। 

मंद हँसत करुणामयी त्रिभुवन मन मोहे॥ 

स्वर्ण सिंहासन बैठी चंवर ढुलावे।

 धूप दीप मधुर भोजन भोग लगावे॥

 गुड़ चना पर विशेष ध्यान माता राखे। 

संतोषी कहलाई खट्टे को न भाखे॥ 

शुक्रवार प्रिय मानत आज दिवस सोहे।

 भक्त मंडली छाई कथा सुनत मोहे॥

 मंदिर जग मग ज्योति मंगल ध्वनि छाई। 

विनय करें हम बालक चरनन शीश नवाई॥

 भक्ति भाव मय पूजा अंगीकृत कीजै। 

जो मन बसे हमारे इच्छा पूर्ति कीजै॥ 

दुखी दरिद्री रोगी संकट मुक्त किए। 

बहु धन धान्य प्रदाय सुख संपन्न किए॥

 जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता। 

अपने सेवक जन की सुख संपत्ति दाता॥

===============================

 संतोषी माता का संदेश

🙏 “संतोष रखो, धैर्य रखो और श्रद्धा से कर्म करो — माता अवश्य कृपा करेंगी।”

यदि आप चाहें तो मैं

16 शुक्रवार व्रत कथा,

-------------------------------------------------------------------------

News MiTAN BANDHU




Post a Comment

Previous Post Next Post