बतख पालन
भारत में पशुपालन के साथ-साथ बतख पालन (Duck Farming) एक ऐसा व्यवसाय बनकर उभरा है, जो कम लागत, कम देखभाल और अधिक उत्पादन के कारण किसानों व ग्रामीण युवाओं के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहा है। विशेषकर जलस्रोतों से जुड़े क्षेत्रों, धान उत्पादक इलाकों और ग्रामीण परिवेश में बतख पालन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
बतख पालन का महत्व
बतख के अंडे व मांस की बाजार में निरंतर मांग
मुर्गियों की तुलना में अधिक रोग प्रतिरोधक क्षमता
गीले क्षेत्रों व तालाबों के आसपास आसानी से पालन
प्राकृतिक आहार पर निर्भरता, जिससे लागत कम
भारत में बतख पालन के लिए निम्न नस्लें अधिक उपयोगी मानी जाती हैं—
1. खाकी कैंपबेल – अधिक अंडा उत्पादन (250–300 अंडे/वर्ष)
2. इंडियन रनर – अंडा उत्पादन के लिए प्रसिद्ध
3. व्हाइट पैकिंग – मांस उत्पादन के लिए उपयुक्त
4. मस्कोवी – बड़े आकार की, मांस के लिए अच्छी
5. देशी बतख – कम खर्च, स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल
बतख पालन कैसे करें
1️⃣ स्थान का चयन
तालाब, नहर, पोखर या जलभराव वाला क्षेत्र
सूखी और हवादार जगह पर शेड
जल निकासी की उचित व्यवस्था
2️⃣ शेड (आवास) व्यवस्था
फर्श पर भूसा, रेत या सूखी घास
प्रति बतख 3–4 वर्गफुट जगह
शेड के पास पानी की सुविधा अनिवार्य
3️⃣ चूजों की देखभाल
पहले 2 सप्ताह अधिक गर्मी की आवश्यकता
साफ पानी और संतुलित आहार
भीड़ न होने दें
बतख का आहार (Feeding Management)
बतख मुख्यतः सर्वाहारी होती हैं—
प्राकृतिक आहार
घास, कीड़े-मकोड़े
तालाब की घोंघी, शैवाल
धान के खेतों में गिरे दाने
पूरक आहार
• मक्का, गेहूं, चावल की भूसी
• सोयाबीन, मूंगफली खली
• खनिज मिश्रण व कैल्शियम
• साफ व ताजा पानी हमेशा उपलब्ध
👉 अंडा देने वाली बतखों को प्रोटीन व कैल्शियम युक्त आहार देना आवश्यक है।
बतख के प्रमुख रोग एवं रोकथाम
प्रमुख रोग
1. डक प्लेग
2. डक कॉलरा
3. एवियन इन्फ्लुएंजा
4. कृमि रोग (Worm Infection)
5. विटामिन की कमी से होने वाले रोग
रोकथाम उपाय
• समय पर टीकाकरण
• साफ-सफाई व स्वच्छ पानी
• बीमार बतख को अलग रखें
• पशु चिकित्सक से नियमित संपर्क
उत्पादन और लाभ
• एक बतख से सालाना 200–300 अंडे
• अंडे का वजन मुर्गी के अंडे से अधिक
• मांस की अच्छी कीमत
• लागत कम, लाभ अधिक
सरकारी सहायता
• पशुपालन विभाग से प्रशिक्षण
• अनुदान व सब्सिडी योजनाएं
• बैंक ऋण सुविधा
बतख पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने वाला एक प्रभावी साधन है। कम लागत, कम जोखिम और सुनिश्चित बाजार के कारण यह किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों और युवाओं के लिए रोजगार का बेहतर विकल्प बन सकता है। यदि वैज्ञानिक तरीके से बतख पालन किया जाए, तो यह व्यवसाय स्थायी आय का मजबूत स्रोत बन सकता है।

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