प्याज की खेती
प्याज भारत की प्रमुख नकदी फसलों में से एक है। यह लगभग हर भारतीय भोजन का अभिन्न हिस्सा है। प्याज न केवल स्वाद बढ़ाता है, बल्कि इसमें औषधीय गुण भी पाए जाते हैं। भारत विश्व के प्रमुख प्याज उत्पादक देशों में शामिल है और इसकी खेती किसानों के लिए अच्छी आय का स्रोत है।
प्याज का महत्व
रसोई में दैनिक उपयोग
औषधीय गुण (पाचन, रक्त शुद्धि, रोग प्रतिरोधक क्षमता)
निर्यात से विदेशी मुद्रा अर्जन
किसानों को कम समय में नकद आय
प्याज की प्रमुख किस्में
रबी मौसम की किस्में
पूसा रेड
नासिक रेड
एग्रीफाउंड लाइट रेड
पूसा मधावी
खरीफ मौसम की किस्में
एग्रीफाउंड डार्क रेड
पूसा रेड
भीमा सुपर
लेट खरीफ किस्में
भीमा शक्ति
भीमा किरण
उपयुक्त जलवायु
प्याज शीतोष्ण और समशीतोष्ण जलवायु में अच्छी होती है
अंकुरण के समय हल्की ठंड
गांठ बनने के समय शुष्क व गर्म मौसम
अत्यधिक वर्षा नुकसानदायक
तापमान
अंकुरण: 20–25°C
गांठ विकास: 25–30°C
मिट्टी का चयन
दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सर्वोत्तम
जल निकास अच्छा होना चाहिए
pH मान: 6.0–7.5
भारी या जलभराव वाली मिट्टी अनुपयुक्त
खेती की तैयारी
खेत की 3–4 गहरी जुताई
पाटा लगाकर भूमि समतल करें
20–25 टन सड़ी हुई गोबर खाद प्रति हेक्टेयर मिलाएं
नर्सरी की तैयारी
बीज दर: 8–10 किग्रा प्रति हेक्टेयर
नर्सरी क्षेत्र: 800–1000 वर्गमीटर
बीज को बोने से पहले फफूंदनाशक से उपचार करें
6–8 सप्ताह में पौधे रोपाई योग्य हो जाते हैं
रोपाई विधि
पौधों की ऊँचाई: 12–15 सेमी
कतार से कतार दूरी: 15 सेमी
पौधे से पौधे दूरी: 10 सेमी
रोपाई शाम के समय करें
उर्वरक प्रबंधन
प्रति हेक्टेयर—
नाइट्रोजन: 100–120 किग्रा
फास्फोरस: 50–60 किग्रा
पोटाश: 80–100 किग्राना
इट्रोजन को 2–3 बार में दें
सिंचाई प्रबंधन
रोपाई के तुरंत बाद सिंचाई
गर्मी में 7–10 दिन में
सर्दी में 12–15 दिन में
खुदाई से 15 दिन पहले सिंचाई बंद
खरपतवार नियंत्रण
2–3 बार निराई-गुड़ाई
रोपाई के 20–25 दिन बाद पहली निराई
आवश्यकता अनुसार खरपतवारनाशी का प्रयोग
प्रमुख रोग एवं कीट
रोग
बैंगनी धब्बा रोग
डाउनी मिल्ड्यू
झुलसा रोग
कीट
थ्रिप्स
तना छेदक
नियंत्रण:
फफूंदनाशक व कीटनाशक का संतुलित प्रयोग
रोग प्रतिरोधी किस्मों का चयन
कटाई एवं खुदाई
जब पत्तियाँ पीली होकर गिरने लगें
गांठ पूरी विकसित हो जाए
कटाई के बाद 8–10 दिन छाया में सुखाएं
उपज
औसत उपज: 250–300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
उन्नत तकनीक से: 350–400 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
भंडारण
सूखी, हवादार जगह
जालीदार भंडारण संरचना
उचित भंडारण से 5–6 माह सुरक्षित
आर्थिक लाभ
लागत: ₹60,000–₹80,000 प्रति हेक्टेयर
आय: ₹1.5–3 लाख (बाजार मूल्य पर निर्भर)
शुद्ध लाभ: ₹80,000–₹2 लाख तक
प्याज की खेती कम समय में अधिक लाभ देने वाली फसल है। वैज्ञानिक तकनीकों, सही किस्मों, संतुलित उर्वरक और उचित सिंचाई से किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। बदलते बाजार में प्याज की मांग निरंतर बनी रहती है, जिससे यह फसल किसानों के लिए आर्थिक रूप से अत्यंत उपयोगी है।

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