कुरुद विकासखंड में महिला स्व-सहायता समूहों की औषधीय खेती बनी आजीविका और सशक्तिकरण का सफल मॉडल
धमतरी - छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री कार्यक्रम के अंतर्गत औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी कार्यक्रम के तहत धमतरी जिले के कुरुद विकासखंड में 27 महिला स्व-सहायता समूहों ने औषधि खेती को अपनाकर एक अनुकरणीय सफलता हासिल की है। आज कुरुद विकासखंड की महिलाएं 53 एकड़ भूमि में औषधीय पौधों की खेती कर न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं वहीं अपने परिवार और समाज के लिए भी एक नई दिशा प्रस्तुत कर रही हैं।
कुरुद विकासखंड परंपरागत रूप से कृषि प्रधान क्षेत्र रहा है जहां वर्षों से धान जैसी फसलों पर निर्भरता रही। परंतु बदलते समय, बढ़ती लागत और सीमित आमदनी के कारण वैकल्पिक आजीविका की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। मुख्यमंत्री कार्यक्रम के अंतर्गत जब औषधीय खेती को प्रोत्साहन मिला तब स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने इसे अवसर के रूप में स्वीकार किया। प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और बैंक लिंकेज के माध्यम से उन्होंने औषधीय खेती की वैज्ञानिक पद्धतियों को समझा और अपने खेतों में उतारा।
इस अवसर पर जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री गजेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि कुरुद विकासखंड में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा औषधीय खेती को अपनाना ग्रामीण आजीविका और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सशक्त उदाहरण है। 53 एकड़ में सफल खेती यह सिद्ध करती है कि सही प्रशिक्षण, बैंकिंग सहयोग और सामूहिक प्रयास से महिलाएं कम संसाधनों में भी टिकाऊ और लाभकारी कृषि मॉडल विकसित कर सकती हैं। आने वाले समय में प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और ब्रांडिंग के माध्यम से इसे और मजबूत किया जाएगा।
इस पहल में कुरुद विकासखंड के विभिन्न ग्रामों की महिला कलस्टर संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। देवी महिला कलस्टर संगठन, चर्रा द्वारा 31.50 एकड़ भूमि में औषधीय खेती की गई। इस कलस्टर से जुड़े 6 समूहों और 18 ग्रामों की महिलाओं ने सामूहिक श्रम, अनुशासन और आपसी सहयोग से अश्वगंधा, कालमेघ, सतावर जैसी औषधीय फसलों की खेती की। बैंकिंग सहयोग के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा कुरुद से खाता खोलकर वित्तीय लेन-देन को पारदर्शी बनाया गया।
इसी प्रकार विकास महिला कलस्टर संगठन, कोर्स द्वारा 5.50 एकड़ भूमि में औषधीय खेती की गई। इस संगठन को बैंक ऑफ बड़ौदा, कोर्रा शाखा से राशि 51,000 रूपये की सहायता प्राप्त हुई। सीमित रकबे के बावजूद महिलाओं ने यह सिद्ध किया कि यदि खेती वैज्ञानिक तरीके से की जाए तो कम भूमि में भी अच्छा उत्पादन और लाभ् ा संभव है। निर्मल महिला कलस्टर संगठन, जी जामगांव की महिलाओं ने पौधशाला विकास और पौध तैयार करने में विशेष दक्षता प्राप्त की जिससे अन्य समूहों को भी गुणवत्तायुक्त औषधीय पौधे उपलब्ध कराए गए।
नई दिशा महिला कलस्टर संगठन, सिरीं द्वारा 14 एकड़ भूमि में औषधीय खेती की गई। इस संगठन को बैंक ऑफ महाराष्ट्र की जी जामगांव शाखा से राशि 2,18,000 रूपये की सहायता प्राप्त हुई। इस समूह की महिलाओं ने जैविक खाद, मल्चिंग और जल-संरक्षण तकनीकों को अपनाकर खेती की लागत कम की और उत्पादन में वृद्धि की। इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक एवं अन्य बैंक शाखाओं के माध्यम से कुल राशि 3,80,000 रूपये की राशि विभिन्न समूहों को उपलब्ध कराई गई जिससे 53 एकड़ क्षेत्र में औषधीय खेती संभव हो सकी। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक की भागीदारी ने ग्रामीण बैंकिंग को मजबूत आधार प्रदान किया।
औषधीय खेती की पूरी प्रक्रिया महिलाओं के लिए एक सीखने का अनुभव रही। भूमि की तैयारी से लेकर पौध चयन, रोपण, सिंचाई, निराई-गुड़ाई, कटाई और भंडारण तक प्रत्येक चरण में महिलाओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। समूह आधारित खेती होने के कारण श्रम और जोखिम साझा हुआ जिससे किसी एक व्यक्ति पर बोझ नहीं पड़ा। साथ ही सामूहिक विपणन के कारण उत्पाद को बेहतर मूल्य भी प्राप्त हुआ।
इस पहल का प्रभाव केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं रहा। महिलाओं की नियमित आय बढ़ने से परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान दिया जाने लगा। महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा और वे निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने लगीं। गांवों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित हुए और परंपरागत खेती पर निर्भरता कम होकर फसल विविधिकरण को बढ़ावा मिला।
हालांकि प्रारंभिक दौर में तकनीकी जानकारी का अभाव और बाजार से जुड़ाव जैसी चुनौतियां सामने आई परंतु विभागीय मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और सामूहिक प्रयासों से इन समस्याओं का समाधान किया गया। अब कुरुद विकासखंड की महिलाएं भविष्य में औषधीय फसलों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग और ब्रांडिंग की दिशा में भी कदम बढ़ाने की योजना बना रही हैं।
कुल मिलाकर कुरुद विकासखंड में मुख्यमंत्री कार्यक्रम के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा 53 एकड़ भूमि में की गई औषधीय खेती एक सफल और प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभरी है

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