हनुमान जी की पूजन विधि, चालीसा एवं आरती शुद्ध, सरल और भक्तिपूर्ण रूप में प्रस्तुत है
श्री हनुमान जी पूजन विधि
पूजन का शुभ समय:
मंगलवार या शनिवार, प्रातः या संध्या
--===::: आवश्यक सामग्री :::===--
लाल फूल
सिंदूर
चमेली का तेल
गुड़-चना या बूंदी का प्रसाद
धूप, दीप
लाल वस्त्र
श्री हनुमान जी की मूर्ति या चित्र
--===::: पूजन विधि :::===--
1. स्नान कर स्वच्छ लाल या साधारण वस्त्र धारण करें।
2. पूजा स्थान को शुद्ध कर श्री हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करें।
3. दीप प्रज्वलित कर संकल्प लें।
4. हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें।
5. लाल फूल, गुड़-चना अर्पण करें।
6. “ॐ हं हनुमते नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
7. इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ करें।
8. अंत में हनुमान जी की आरती करें।
9. प्रसाद वितरण कर पूजा पूर्ण करें।
--===::: श्री हनुमान चालीसा:::===--
दोहा:
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस विकार॥
चालीसा (संक्षेप में प्रमुख पंक्तियाँ):
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥
राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥
महावीर विक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥
कंचन वरन विराज सुवेशा।
कानन कुण्डल कुंचित केशा॥
(…पूर्ण चालीसा पाठ परंपरानुसार…)
दोहा:
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
--===:::श्री हनुमान जी की आरती :::===--
आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरिवर काँपे।
रोग दोष जाके निकट न झाँके॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई।
संतन के प्रभु सदा सहाई॥
दे बीरा रघुनाथ पठाए।
लंका जारि सिया सुध लाए॥
लंका सो कोट समुद्र सी खाई।
जात पवनसुत बार न लाई॥
लंका जारि असुर संहारे।
सियारामजी के काज सँवारे॥
आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
--===::: पूजन का फल :::===--
भय, रोग और संकट से मुक्ति
बल, बुद्धि और आत्मविश्वास की वृद्धि
शत्रु बाधा का नाश
श्रीराम की कृपा प्राप्ति

Post a Comment