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मशरूम की खेती

                               मशरूम की खेती


विशेष रिपोर्ट - जयप्रकाश सिन्हा

मशरूम एक पौष्टिक, स्वादिष्ट और औषधीय गुणों से भरपूर प्राकृतिक खाद्य पदार्थ है। आज मशरूम न सिर्फ भोजन के रूप में, बल्कि आय बढ़ाने वाली कृषि गतिविधि के रूप में भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।



आइये जाने  क्या है मशरूम?

• मशरूम एक कवक (Fungus) है, यह न तो पौधा है और न ही जानवर।

• इसमें क्लोरोफिल नहीं होता, इसलिए यह प्रकाश संश्लेषण नहीं करता।

• मशरूम (भूसा, पुआल, लकड़ी, गोबर आदि) पर उगता है।

सरल शब्दों में—

• मशरूम एक प्राकृतिक, प्रोटीन युक्त खाद्य कवक है।


मशरूम खाने के फायदे:-

1. प्रमुख पोषक तत्व

• उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन

• फाइबर

• विटामिन – B, D

• खनिज – आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम

• एंटीऑक्सीडेंट


2. स्वास्थ्य लाभ

✔ इम्यूनिटी बढ़ाता है

✔ वजन घटाने में सहायक

✔ डायबिटीज व हार्ट रोग में लाभकारी

✔ कोलेस्ट्रॉल कम करता है

✔ कैंसर रोधी गुण (कुछ प्रजातियों में)

✔ हड्डियों को मजबूत बनाता है


मशरूम की  प्रजातियाँ :- 




पूरी दुनिया में मशरूम की लगभग 14,000 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं लेकिन—

लगभग 3,000 प्रजातियाँ खाने योग्य मानी जाती हैं

जिसमे से केवल 30–40 प्रजातियाँ व्यावसायिक खेती के लिए उपयुक्त हैं



भारत की जलवायु विविध होने के कारण यहाँ कई प्रकार के मशरूम पाए जाते है जिसमे से निम्न 5 प्रजातीय खेती हेतु सर्वश्रेष्ठ है :-

1. बटन मशरूम (Button Mushroom)
– सबसे ज्यादा खाया जाने वाला
– ठंडी जलवायु में उपयुक्त


2. ऑयस्टर मशरूम (Dhingri)
– कम लागत, आसान खेती
– लगभग पूरे भारत में संभव


3. पैडी स्ट्रॉ मशरूम
– धान के भूसे पर उगाया जाता है
– दक्षिण भारत में लोकप्रिय


4.मिल्की मशरूम (दूधिया मशरूम)
– गर्म जलवायु के लिए उपयुक्त
– सफेद और आकर्षक आकार


5. शिटाके मशरूम
– औषधीय गुणों से भरपूर
– पूर्वोत्तर भारत में प्रचलित

 मशरूम उत्पादन के लिए उपयुक्त मौसम और किस्में

मशरूम उत्पादन पूरी तरह तापमान, नमी और मौसम पर निर्भर करता है। आपने जिन प्रमुख मशरूमों का उल्लेख किया है, उनके लिए उपयुक्त मौसम / तापमान नीचे सरल रूप में दिया जा रहा है 

1. बटन मशरूम (Button Mushroom)

मौसम: ❄️ सर्दी
उपयुक्त तापमान:

  • स्पॉन रन: 22–25°C
  • फलन (उगना): 14–18°C

समय:

  • अक्टूबर से फरवरी
  • पहाड़ी एवं ठंडे क्षेत्रों में अधिक सफल

2. ऑयस्टर मशरूम (ढिंगरी)

मौसम: 🌤️ लगभग सभी मौसम
उपयुक्त तापमान: 20–30°C

समय:

  • साल भर (थोड़ी छाया और नमी जरूरी)
  • शुरुआती किसानों के लिए सबसे बेहतर

3. पैडी स्ट्रॉ मशरूम

मौसम: ☀️ गर्म व आर्द्र
उपयुक्त तापमान: 30–38°C

समय:

  • मार्च से अक्टूबर
  • दक्षिण भारत एवं तटीय क्षेत्रों में अधिक उत्पादन

4. मिल्की मशरूम (दूधिया मशरूम)

मौसम: 🌞 गर्म
उपयुक्त तापमान: 25–35°C

समय:

  • मार्च से सितंबर
  • मध्य एवं दक्षिण भारत के लिए उपयुक्त

5. शिटाके मशरूम

मौसम: ❄️ ठंडा व हल्का नम
उपयुक्त तापमान: 15–25°C

समय:

  • अक्टूबर से मार्च
  • पूर्वोत्तर भारत व पहाड़ी क्षेत्रों में सफल

 सारांश तालिका

मशरूम का नाम मौसम तापमान
बटन सर्दी 14–18°C
ऑयस्टर सभी 20–30°C
पैडी स्ट्रॉ गर्म 30–38°C
मिल्की गर्म 25–35°C
शिटाके ठंडा 15–25°C


इस तरह किसान पूरे वर्ष अलग-अलग किस्मों की खेती कर निरंतर आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। मशरूम की खेती छोटे कमरे से लेकर बड़े शेड तक आसानी से की जा सकती है।


 मशरूम की खेती के लिए जरूरी सामग्री

बीज (स्पॉन) – सरकारी मान्यता प्राप्त संस्थान से

कीमत: ₹30 से ₹50 प्रति किलो


पॉलीथीन बैग (15×16 इंच)

₹1200–1500 प्रति 100 बैग


सब्सट्रेट (भूसा)

गेहूं, धान, राई या कपास का भूसा


नोट - विशेषज्ञों के अनुसार खराब गुणवत्ता का स्पॉन उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को प्रभावित करता है, इसलिए प्रमाणित बीज का उपयोग आवश्यक है।


1. ढींगरी मशरूम: किसानों की पहली पसंद

ढींगरी मशरूम की खेती कर्नाटक, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्वी राज्यों में बड़े पैमाने पर की जा रही है।

ढींगरी मशरूम की विशेषताएं

• कृषि अवशिष्टों पर आसानी से उत्पादन

  45–60 दिन में फसल तैयार

• सुखाकर लंबे समय तक भंडारण संभव

• कम लागत में अधिक मुनाफा


 भूसे का उपचार जरूरी




गर्म पानी विधि

• 50–60°C गर्म पानी में भूसे को 20–30 मिनट तक उबालें

• बाहर निकालकर जाली पर फैलाएं

• ठंडा होने पर स्पॉन मिलाएं


रासायनिक विधि

• 90 लीटर पानी में 7.5 ग्राम कार्बेन्डाजिम और 125 मि.ली. फॉर्मलीन मिलाएं

• 10–12 किलो सूखा भूसा डालकर 14–16 घंटे ढककर रखें

• बाद में 2–4 घंटे अतिरिक्त पानी निकालें


 बुवाई की प्रक्रिया



• कमरे को 2% फॉर्मलीन से उपचारित करें

• 50 किलो सूखे भूसे के लिए 5 किलो स्पॉन

• 4 किलो गीले भूसे में 100 ग्राम बीज मिलाएं

• पॉलीथीन बैग में भरकर रबर बैंड से बंद करें

• बैग में 10–15 छोटे छेद करें


 बुवाई के बाद देखभाल



• 2–4 दिन में बैग की जांच करें

• फफूंद लगे बैग तुरंत हटाएं

• तापमान 30°C से अधिक होने पर पानी का छिड़काव करें

• 15–25 दिन में पूरा बैग सफेद दिखाई देने लगता है

• फलन के समय दिन में 2–3 बार हल्का पानी छिड़कें और 6–8 घंटे प्रकाश की व्यवस्था करें।

 

 तुड़ाई और उत्पादन




• 15–25 दिन में पहली तुड़ाई

• 8–10 दिन के अंतराल पर कुल 3 तुड़ाई

• 1 किलो सूखे भूसे से 600–650 ग्राम उत्पादन


 बाजार और मुनाफा

• लागत: ₹10–15 प्रति बैग

• बाजार मूल्य: ₹200–300 प्रति किलो

• तुड़ाई के 2–3 घंटे बाद पैकिंग करें

• सुखाकर बेचने पर अतिरिक्त लाभ

मशरूम की खेती किसानों के लिए कम लागत, कम जोखिम और अधिक मुनाफे वाला व्यवसाय है। सही प्रशिक्षण, गुणवत्ता युक्त बीज और वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर किसान अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं।

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