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चने की खेती

 

चने की खेती 

चना भारत की प्रमुख दलहनी फसलों में से एक है। यह न केवल प्रोटीन का महत्वपूर्ण स्रोत है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी सहायक है। भारत विश्व में चने का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। कम लागत, कम पानी की आवश्यकता और अच्छी बाजार मांग के कारण चना किसानों की पसंदीदा फसल मानी जाती है।

ने का महत्व

चना प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम और आयरन से भरपूर होता है

यह शाकाहारी लोगों के लिए सस्ता प्रोटीन स्रोत है

दलहनी फसल होने से नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है

मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है

पशुओं के चारे के रूप में भी उपयोगी


जलवायु और भूमि

जलवायु

चना रबी मौसम की फसल है

ठंडी व शुष्क जलवायु उपयुक्त

तापमान: 20–25°C

अधिक नमी व पाला नुकसानदायक


भूमि

दोमट से बलुई दोमट मिट्टी सर्वोत्तम

जल निकास अच्छा होना चाहिए

pH मान: 6 से 7.5


 उन्नत किस्में

देशी चना

JG-11

JAKI-9218

चाफा

गौरव


काबुली चना

KAK-2

शुभ्रा

IPCK-02


 खेत की तैयारी

2–3 जुताई कर खेत भुरभुरा करें

अंतिम जुताई में गोबर की सड़ी खाद मिलाएं

समतल खेत बीज अंकुरण में सहायक


 बीज दर व बुवाई

बीज दर:

देशी चना: 60–75 किग्रा/हेक्टेयर

काबुली चना: 100–120 किग्रा/हेक्टेयर


बुवाई समय:

अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर मध्य तक

कतार दूरी: 30–45 सेमी

बीजोपचार:

राइजोबियम + ट्राइकोडर्मा से उपचार आवश्यक


 खाद एवं उर्वरक प्रबंधन

गोबर खाद: 5–10 टन/हेक्टेयर

रासायनिक उर्वरक:

नाइट्रोजन: 20 किग्रा

फास्फोरस: 40–60 किग्रा

जिंक की कमी होने पर जिंक सल्फेट दें


 सिंचाई प्रबंधन

सामान्यतः चना वर्षा आधारित फसल है

आवश्यक सिंचाई चरण:

फूल आने पर

दाना भरने के समय

अधिक पानी से जड़ सड़न की आशंका


 खरपतवार नियंत्रण

बुवाई के 30–40 दिन बाद निराई-गुड़ाई

रासायनिक नियंत्रण:

पेंडीमेथालिन का प्रयोग


 कीट एवं रोग प्रबंधन

प्रमुख कीट

फली छेदक कीट

तना छेदक


नियंत्रण

फेरोमोन ट्रैप

नीम आधारित कीटनाशक

आवश्यकता अनुसार अनुशंसित कीटनाशक


प्रमुख रोग

उकठा रोग

झुलसा रोग


बचाव

रोग प्रतिरोधी किस्म

फसल चक्र अपनाना


 कटाई व उत्पादन

फसल अवधि: 90–120 दिन

पत्तियाँ पीली होने पर कटाई

औसत उत्पादन:

15–20 क्विंटल/हेक्टेयर

उन्नत तकनीक से 25 क्विंटल तक संभव


 आर्थिक लाभ

लागत कम, लाभ अधिक

समर्थन मूल्य (MSP) उपलब्ध

बाजार में सालभर मांग

प्रसंस्करण व निर्यात की संभावना


चना की खेती किसानों के लिए लाभकारी, टिकाऊ और पोषणयुक्त विकल्प है। वैज्ञानिक पद्धति, उन्नत बीज, संतुलित खाद एवं समय पर रोग नियंत्रण से चने की उपज और आमदनी दोनों बढ़ाई जा सकती हैं। यह फसल कृषि के साथ-साथ पोषण सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाती है।


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