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मोरिंगा (सहजन/ड्रमस्टिक) की खेती

 

मोरिंगा (सहजन/ड्रमस्टिक) की खेती 


1. परिचय

मोरिंगा (Moringa oleifera) को हिंदी में सहजन, सांजन या ड्रमस्टिक कहा जाता है। इसे “सुपरफूड वृक्ष” भी कहा जाता है क्योंकि इसके पत्ते, फल, फूल, बीज और जड़—लगभग सभी भाग उपयोगी और बाजार में बिकाऊ होते हैं। भारत में इसकी खेती कम लागत में अधिक लाभ देने वाली मानी जाती है।


2. मोरिंगा की प्रमुख किस्में

किस्म विशेषता
पीकेएम-1 अधिक फलन, जल्दी तैयार
पीकेएम-2 पत्तों के लिए उत्तम
ओडिसी सूखा सहनशील
स्थानीय किस्में कम लागत, घरेलू उपयोग

3. जलवायु एवं भूमि

  • जलवायु: उष्ण एवं शुष्क जलवायु उपयुक्त
  • तापमान: 25–35°C
  • भूमि:
    • हल्की दोमट से बलुई दोमट
    • जल निकास अच्छा होना चाहिए
    • pH: 6.5–7.5

4. बुवाई का समय एवं विधि

(A) बीज द्वारा खेती

  • समय: फरवरी–मार्च या जून–जुलाई
  • बीज मात्रा: 400–500 ग्राम/एकड़
  • दूरी:
    • पत्तों हेतु: 1×1 फीट
    • फल हेतु: 8×8 फीट

(B) कलम द्वारा

  • 1–1.5 मीटर लंबी कलम
  • शीघ्र फलन मिलता है

5. खाद एवं सिंचाई

  • गोबर खाद: 8–10 टन/एकड़
  • यूरिया, डीएपी, पोटाश संतुलित मात्रा में
  • सिंचाई:
    • गर्मी में 7–10 दिन
    • वर्षा में आवश्यकतानुसार

6. रोग एवं कीट प्रबंधन

रोग/कीट नियंत्रण
इल्ली नीम तेल स्प्रे
पत्ती धब्बा कॉपर फंगीसाइड
तना सड़न जल निकास सुधार

7. मोरिंगा से लाभ प्राप्त करने के तरीके

मोरिंगा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके लगभग सभी भाग बिकते हैं

7.1 मोरिंगा के बिकाऊ भाग

भाग उपयोग बाजार
पत्ते पाउडर, सब्जी, चाय आयुर्वेद, फार्मेसी
फल (सहजन) सब्जी सब्जी मंडी
फूल औषधीय, सब्जी लोकल बाजार
बीज तेल, पानी शुद्धिकरण कॉस्मेटिक
बीज का तेल हेयर ऑयल, स्किन निर्यात
छाल व जड़ औषधि आयुर्वेदिक कंपनियाँ

8. मोरिंगा से बनने वाले प्रमुख उत्पाद

  • मोरिंगा पत्ती पाउडर
  • मोरिंगा कैप्सूल/टैबलेट
  • मोरिंगा चाय
  • मोरिंगा बीज तेल
  • पशु आहार (ग्रीन फोडर)
  • हर्बल साबुन व क्रीम

9. लागत एवं संभावित लाभ (प्रति एकड़ अनुमान)

विवरण अनुमानित राशि (₹)
कुल लागत 25,000 – 35,000
वार्षिक उत्पादन 3–5 टन पत्ते / फल
कुल आय 80,000 – 2,50,000
शुद्ध लाभ 60,000 – 2,00,000

यदि प्रोसेसिंग (पाउडर/तेल) की जाए तो लाभ 3–4 गुना तक बढ़ सकता है।


10. मोरिंगा खेती के प्रमुख फायदे

  • कम पानी में उत्पादन
  • बहुवर्षीय फसल
  • हर भाग से आय
  • औषधीय एवं निर्यात योग्य
  • जैविक खेती के लिए उपयुक्त

मोरिंगा (सहजन) की खेती छोटे और बड़े किसानों दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी व्यवसाय है। इसकी खासियत यह है कि केवल फल ही नहीं बल्कि पत्ते, बीज, फूल और तेल—सब बिकाऊ हैं। यदि किसान वैल्यु एडिशन (पाउडर, तेल, कैप्सूल) करें तो यह खेती उच्च आय का स्थायी साधन बन सकती है।

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