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स्पाइरुलिना खेती (Spirulina Farming)

 

स्पाइरुलिना खेती (Spirulina Farming)



1. स्पाइरुलिना क्या है?

स्पाइरुलिना एक नीले-हरे रंग का साइनोबैक्टीरिया (Blue-Green Algae) है जिसे शैवाल की श्रेणी में रखा जाता है। यह प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से ऊर्जा उत्पन्न करता है और पोषक तत्वों से अत्यंत समृद्ध होता है। इसे ‘सुपरफूड’ भी कहा जाता है क्योंकि इसमें उच्च प्रोटीन, विटामिन, खनिज तथा एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं।

 2. खेती की वैज्ञानिक आवश्यकता

प्राकृतिक आधार: ताजे या क्षारीय पानी में बढ़ता है।

प्रोटीन सामग्री: लगभग 40–70% तक प्रोटीन प्रदान करता है — इसमें सभी आवश्यक अमीनो एसिड भी रहते हैं।

कम संसाधन: कम भूमि, पानी और शुरुआती निवेश में खेती संभव है।


3. स्पाइरुलिना खेती कैसे करें (Step-by-Step)

3.1 स्थान और जलवायु

तापमान: 25 °C से 38 °C के बीच उपयुक्त।

धूप: पर्याप्त प्रकाश परन्तु सख्त सीधे धूप से बचें।


3.2 टैंक/तालाब की तैयारी

टैंक आकार (उदाहरण): 10 × 5 × 1.5 फ़ीट या इससे बड़े टैंक।

जल का pH: 9 से 11 तक रखा जाता है।

पानी में पोषक तत्व: मिनरल्स और सोडियम बायकार्बोनेट जैसे पोषक मिलाकर PH संतुलित किया जाता है।


3.3 कल्चरिंग (उगाना)

मदर कल्चर (स्टार्टर) को पानी में मिलाएं।

नियमित रूप से हलचल करें और पोषक तत्व समय-समय पर जोड़ें।

शैवाल विकसित होने पर पानी का रंग हल्का हरा-हरा हो जाता है।


3.4 कटाई और तैयारी

सफाई: विकसित शैवाल को फिल्टर या झिल्ली द्वारा अलग किया जाता है।

सुखाना: धूप/सोलर टनल/स्प्रे ड्रायर का उपयोग कर सुखाया जाता है।

पाउडर बनाना: सुखाकर चूर्ण (पाउडर) तैयार किया जाता है।

पैकेजिंग: एयर-टाइट पैकेट/कंटेनर में पैक किया जाता है।


 4. लागत एवं संभावित आय

स्पाइरुलिना खेती में कम भूमि और कम निवेश की आवश्यकता होती है।

छोटे पैमाने पर किसान भी इसे शुरू कर सकते हैं और नियमित आमदनी प्राप्त कर सकते हैं।

उदाहरण: एक टैंक से प्रति दिन कुछ ग्राम से लेकर सूखे रूप में किलोग्राम उत्पादन तक सम्भव है और बाजार में इसका रेट ₹500–₹1000/किलो तक मिलता है।

प्रोसेसिंग (कैप्सूल, पाउडर आदि) करके लाभ 3–4 गुना तक बढ़ सकता है।

5. स्पाइरुलिना के लाभ (Health & Nutrition)

मुख्य स्वास्थ्य लाभ

उच्च प्रोटीन: लगभग 60–70% प्रोटीन सामग्री।

एंटीऑक्सिडेंट्स एवं न्युट्रिएंट्स: विटामिन B12, आयरन, विटामिन E, मिनरल्स।

प्रतिरक्षा में सहायक: रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है।

ब्लड शुगर नियंत्रण: डायबिटीज़ में सहायक हो सकता है।


ध्यान: स्वास्थ्य से संबंधित उपयोग के लिए विशेषज्ञ सलाह लेना आवश्यक है।


 6. स्पाइरुलिना से बनने वाले प्रोडक्ट्स

स्पाइरुलिना को कई प्रकार के उत्पादों में बदला जाता है, जिनके बाजार में अच्छे अवसर हैं:

6.1 खाद्य एवं सप्लीमेंट

स्पिरुलिना पाउडर

कैप्सूल / टैबलेट

एनर्जी बार / प्रो्टीन सप्लीमेंट


6.2 सौंदर्य एवं त्वचा उत्पाद

स्पिरुलिना साबुन (Skin Care)

फेस पैक / मास्क


अन्य प्राकृतिक सौंदर्य प्रसाधन जिसमें स्पिरुलिना शामिल है।

 कृषि एवं पशु आहार

पशु फ़ीड सप्लीमेंट

एंटीऑक्सिडेंट ऐडेड कप्लेक्स


 खाद्य उत्पादों में फोर्टिफिकेशन

बिस्कुट/नूडल/कुकीज़ आदि में प्रोटीन और आयरन बढ़ाने के लिए।


. बाजार और व्यापार संभावनाएँ

स्थानीय और निर्यात बाजार: स्पिरुलिना की मांग भारत और विदेशों दोनों में बढ़ रही है।

ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन: जैविक प्रमाणित उत्पादों (Organic Certified) पर बेहतर दाम मिलता है।

ब्रांडिंग: स्वास्थ्य/स्किन केयर/फिटनेस ब्रांडों के लिए एक लाभदायक पोषण पूरक।

स्पाइरुलिना खेती: ✔ कम निवेश में शुरू हो सकती है
✔ बाजार में अच्छे रेट पर बिकती है
✔ स्वास्थ्य तथा सौंदर्य दोनों क्षेत्रों में मांग रखती है
✔ किसानों और उद्यमियों दोनों के लिए आय स्रोत बन सकती है

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